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राजाबरारी में श्री कमल पटेल जी का आत्मीय प्रवास | सेवा, शिक्षा और सशक्तिकरण📝

A K Mehta – Explore Life

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राजाबरारी में श्री कमल पटेल जी का आत्मीय प्रवास | सेवा, शिक्षा और सशक्तिकरण📝

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शिक्षा, महिला सशक्तिकरण एवं ग्रामीण विकास की गतिविधियों से प्रभावित हुए कमल पटेल राजाबरारी। मध्य प्रदेश शासन में चिकित्सा एवं तकनीकी शिक्षा, राजस्व एवं कृषि विभागों के मंत्री रह चुके तथा हरदा विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक रहे श्री कमल पटेल आज अपनी धर्मपत्नी एवं सुपुत्र के साथ राजाबरारी एस्टेट पधारे। श्री पटेल ग्राम बोरी में चल रही फिल्म की शूटिंग का अवलोकन करने आए हुए थे। इसी दौरान उन्होंने राजाबरारी का औचक दौरा किया। राजाबरारी प्रवास के दौरान श्री पटेल ने संस्था की विभिन्न गतिविधियों का अवलोकन किया तथा आदिवासी महिला प्रशिक्षणार्थियों, महिला एसोसिएशन, डीईआई आगरा से विद्यालयों में शिक्षण कार्य हेतु आए बी.एड. इंटर्न्स तथा समर्पित स्टाफ सदस्यों से आत्मीय मुलाकात की। उन्होंने संस्था द्वारा शिक्षा, महिला सशक्तिकरण तथा ग्रामीण एवं आदिवासी विकास के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली और विभिन्न गतिविधियों को निकट से देखा। राजाबरारी एस्टेट में राधास्वामी सतसंग एवं दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट द्वारा सिलाई, बुनाई, फूड प्रोसेसिंग एवं डेयरी टेक्नोलॉजी सहित विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य स्थानीय आदिवासी महिलाओं को केवल प्रशिक्षण देना ही नहीं, बल्कि उन्हें उत्पादन, मूल्य संवर्धन और विपणन से जोड़कर स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है। संस्था के राजाबरारी स्थित नौ विद्यालयों के लगभग 2,000 गणवेश एवं 1,000 स्वेटर स्थानीय आदिवासी महिलाओं द्वारा तैयार किए जाते हैं। शासन की संबंधित योजना के संचालन के दौरान हरदा जिले के 72 विद्यालयों के लगभग 9,000 गणवेश भी राजाबरारी की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर भी महिलाओं ने मात्र एक सप्ताह में 1,000 गणवेश तैयार किए। वर्तमान में लगभग 70 महिलाएं समूह के रूप में इन गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं। फूड प्रोसेसिंग के अंतर्गत प्रतिमाह लगभग 500 किलोग्राम मसालों का निर्माण किया जा रहा है, जिनकी बिक्री संस्था के माध्यम से इंदौर, भोपाल एवं आगरा में की जाती है। स्थानीय पशुपालकों के लिए भी बनी सुविधा राजाबरारी की डेयरी गतिविधियों से आसपास के स्थानीय किसानों और पशुपालकों को भी लाभ मिल रहा है। जो पशुपालक अधिक दूरी अथवा परिवहन की सुविधा के अभाव में अपना दूध बाजार तक नहीं पहुंचा पाते थे, उनके लिए राजाबरारी में दूध संकलन की व्यवस्था एक महत्वपूर्ण सुविधा बन गई है। बरसात के बाद के सीजन में लगभग 25 स्थानीय किसानों से दूध का संकलन कर महिलाएं पनीर, मावा, घी, मट्ठा आदि उत्पाद तैयार करती हैं। पूरे सीजन में करीब 15,000 से 20,000 लीटर दूध की प्रोसेसिंग महिलाओं की खाद्य सुरक्षा पंजीकृत इकाई के माध्यम से की जाती है। इसके अतिरिक्त महिलाओं द्वारा अपनी मशीन से जैविक सरसों का तेल तैयार किया जाता है। जैविक शहद, मोरिंगा पत्ती तथा अन्य स्थानीय वनोपज आधारित उत्पादों का भी निर्माण किया जा रहा है। 100 एकड़ जैविक खेती से बच्चों की थाली तक राजाबरारी एस्टेट में लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में जैविक खेती की जाती है। यहां उत्पादित गेहूं, चावल, दाल, सब्जियां, सरसों एवं अन्य कृषि उत्पादों का उपयोग संस्था द्वारा लगभग 1,000 बच्चों को निःशुल्क पौष्टिक मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराने में किया जाता है। इस प्रकार जैविक खेती, स्थानीय उत्पादन और बच्चों के पोषण को एक ही व्यवस्था से जोड़ा गया है। बिना शुल्क शिक्षा एवं संपूर्ण शैक्षणिक सहयोग राजाबरारी एस्टेट के नौ विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में भी एक विशिष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। ये मध्य प्रदेश में संभवतः ऐसे एकमात्र निजी विद्यालय हैं, जहां निजी स्कूल होने के बावजूद लगभग 1,000 विद्यार्थियों से शिक्षा के लिए कोई फीस अथवा अन्य शुल्क नहीं लिया जाता। विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ गणवेश, पौष्टिक मध्यान्ह भोजन, पात्रतानुसार साइकिल, पुस्तकें एवं अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्री भी बिना शिक्षा विभाग के अनुदान के पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। संस्था के ग्रामीण विकास कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता प्राप्त हो चुकी है। वर्ष 2020 में शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संस्था को ग्रामीण विकास के क्षेत्र में राष्ट्रीय उत्कृष्ट संस्थान विश्वकर्मा पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। राजाबरारी में संस्था द्वारा संचालित गतिविधियां केवल प्रशिक्षण अथवा शिक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शिक्षा, कौशल विकास, महिला स्वावलंबन, स्थानीय किसानों एवं पशुपालकों से जुड़ाव, जैविक खेती, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, वनोपज और बच्चों के पोषण को एक समग्र व्यवस्था के रूप में जोड़ती हैं। श्री कमल पटेल ने राजाबरारी में किए जा रहे कार्यों के प्रति प्रसन्नता व्यक्त की तथा संस्था के गुणवत्तापूर्ण, सेवाभावी एवं ग्रामीण-आदिवासी क्षेत्र के उत्थान के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने महिला प्रशिक्षणार्थियों एवं कार्यकर्ताओं से भी आत्मीय संवाद किया और उनके कार्यों की जानकारी ली। #Rajaborari #KamPatel #WomenEmpowerment #RuralDevelopment #Education #SkillDevelopment #OrganicFarming #Dayalbagh #AKMehta