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0 से 9: अंकों की रहस्यमय उत्पत्ति [0 to 9- The mysterious origins of numbers] DW Documentary हिन्दी

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0 से 9: अंकों की रहस्यमय उत्पत्ति [0 to 9- The mysterious origins of numbers] DW Documentary हिन्दी

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जब इन चिह्नों का आविष्कार भारत में हुआ, तो यूरोप इन्हें ‘अरबी अंक’ क्यों कहता है? ये दस छोटे चिह्न पूरी दुनिया में कैसे छा गए? और शून्य ने इतिहास की दिशा कैसे बदल दी? पश्चिमी दुनिया इन्हें ‘अरबी अंक’ कहती है, जबकि अरब दुनिया में यूरोप में इस्तेमाल होने वाले अंकों के रूप को पश्चिमी माना जाता है. तो भारत से यूरोप और फिर दुनियाभर में पहुंचे इन चिह्नों में ’अरबी’ क्या है? हमारे अंकों के सफ़र के निशान हमें बग़दाद तक ले जाते हैं. आठवीं सदी में अल-ख़्वारिज़्मी नाम के विद्वान ने भारतीय अंकों के प्रसार में अहम भूमिका निभाई. उनके नाम का लैटिन रूप ’अल्गोरिज़्मी’ था, जिसकी झलक आगे ‘एल्गोरिदम’ शब्द में मिलती है. उन्हें आधुनिक बीजगणित का जनक कहा गया. आज यूरोप में प्रचलित ’अरबी’ अंक ग़ुबार नाम के दूसरे रूप से निकले, यानी ’धूल’, जो मग़रिबी व्यापारियों के धूल के तख़्तों से विकसित हुआ. यूरोप से अमेरिका तक, आधुनिक विज्ञान की शुरुआत से कंप्यूटर युग तक इन 10 छोटे अंकों का रोमांचक सफ़र उन लोगों की कहानी से जुड़ा है, जिन्होंने इन्हें बनाया, इनका प्रसार किया, इन्हें अपनाया, लागू किया और परखा. धीरे-धीरे ये हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में रच-बस गए. कंप्यूटर के दौर में अंक आधुनिक दुनिया का कोड बने और सही मायने में यूनिवर्सल लैंग्वेज बन गए. #dwdocumentaryहिन्दी #dwहिन्दी #dwdocs #mathematics #binarycode #globalhistory ---------------------------------------------------------------------------------------- अगर आपको वीडियो पसंद आया और आगे भी ऐसी दिलचस्प वीडियो देखना चाहते हैं तो हमें सब्सक्राइब करना मत भूलिए. विज्ञान, तकनीक, सेहत और पर्यावरण से जुड़े वीडियो देखने के लिए हमारे चैनल DW हिन्दी को फॉलो करे: ‪@dwhindi‬ और डॉयचे वेले की सोशल मीडिया नेटिकेट नीतियों को यहां पढ़ें: https://p.dw.com/p/MF1G