नारनौल में देखने लायक पर्यटन स्थल,जल महल,चोर गुंबद, बीरबल का छता, खालड़ा हनुमान मंदिर,Dhosi पहाड़ी
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नारनौल में देखने लायक पर्यटन स्थल,जल महल,चोर गुंबद, बीरबल का छता, खालड़ा हनुमान मंदिर,Dhosi पहाड़ी
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नारनौल में देखने लायक पर्यटन स्थल,जल महल,चोर गुंबद, बीरबल का छता, खालड़ा हनुमान मंदिर,Dhosi पहाड़ी
सभी को नमस्कार राम-राम
मेरे यूट्यूब चैनल यात्रा सॉल्यूशन में आप सभी का स्वागत है। दोस्तों आज पहुंच गए हैं ऐतिहासिक नगरी नारनौल। नारनौल भारत में हरियाणा राज्य के महेंद्रगढ़ जिले का एक नगर है यह है महेंद्रगढ़ से लगभग 30 किलोमीटर दूर है ।और यह महेंद्रगढ़ जिले का मुख्यालय भी है नारनौल अपने ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां का वाहन रजिस्ट्रेशन कोड हर 35 है।
नारनौल के इतिहास और नामकरण को लेकर कोई प्रामाणिक तथ्य नहीं है भागवत पुराण के अनुसार इस नंदीग्राम कहा जाता था और महाभारत काल में से राष्ट्र के नाम से जाना जाता था यह भी प्रचलित है कि यह इलाका पहले बोल जंगल से ढका हुआ था ।और शेरों का ठिकाना हुआ करता था ।जंगल को साफ करके यहां पर नगर बसाया गया इसी लिए इसका नाम नहरनौल रखा गया। जो कालांतर में नारनौल हो गया है।
मुगल बादशाह बाबर ने अपनी पुस्तक तुजक ए बाबरी में यहां कपास मंडी होने का उल्लेख किया है।जिससे जाहिर होता है कि यहां कपास की खेती होती थी।
12वीं शताब्दी के पहले दो दशकों तक यहां राजपूतों का शासन रहा
पानीपत की दूसरी लड़ाई के बाद यह इलाका अकबर के नियंत्रण में था उसने सम्राट हैम को गिरफ्तार करने के इनाम के तौर पर शाहकुली खान को दे दिया था ।इस प्रकार शाहकुली खान यहां का जागीरदार बना। जिसने नारनौल में जल महल का निर्माण करवाया। जल महल का निर्माण शाह कुली खान के द्वारा 1590 से 91 ईस्वी में करवाया गया था। जो सम्राट अकबर के शासनकाल 1556 से 1605 ईस्वी में नारनौल का गवर्नर बना था। जल महल लगभग 450 वर्ष पहले बनाया गया था। जल महल जल के बीच में बना हुआ था।शाहकुली खान इस जल महल का उपयोग अपने आमोद पर प्रमोद एवं मनोरंजन के लिए किया करता था। इसका मुख्य द्वार उत्तर दिशा में बना हुआ है। जल महल को सामने से देखने पर आपको एक बहुत बड़ी मेहराब दिखाई देगी इसके दाएं एवं बाय वाले हिस्से पर भी दो छोटी-छोटी मेहराब बनाई गई है ।इसकी खासियत यह है कि बाहर की तरफ से देखने पर यह दो मंजिलाई इमारत दिखाई देती है। इसके ऊपर चारों कोनों में चार क्षत्रिय बनाई गई है और बीच वाले हिस्से में एक बहुत बड़ी छतरी बनाई गई है जो इसकी सुंदरता को और भी ज्यादा बढ़ा देती है। मुख्य प्रवेश द्वार के ऊपरी हिस्से पर एक शिलालेख लगाई गई है इससे पता चलता है कि लगभग साढे चार सौ साल पहले शाह कुली खान ने इसका निर्माण करवाया था।
दोस्तों जल महल को देखने के बाद अब हम चोर गुंबद पर पहुंच गए हैं। चोर गुंबद की बात करें तो इसका निर्माण अफगान जमाल खान ने अपनी मकबरे के रूप में करवाया था। छोटा गुंबद और मेहराब यह दर्शाती है कि इसका निर्माण फिरोज शाह तुगलक ने 1351 से 1388 ई के शासनकाल के दौरान हुआ होगा। सामने से देखने पर यह आपको दो मंजिलाई इमारत दिखाई देती है जिसमें पांच डबलआर्च वाले मेरा बनाए गए हैं। थोड़ा और ऊपर देखने पर आपको एक हेमिस्फेरिकल गुंबद दिखाई देगा दाएं साइड दो पिलर और भुज भी आपके यहां पर देखने को मिलेंगे। पुरी की पूरी इमारत वर्गाकार रूप में बनाई गई है इसका निर्माण हर एक कोने से एक जैसा लगता है और यह इंडो इस्लामी शैली में बनी हुई है। पुराने समय में यह शहर से बिल्कुल बाहर होता था ऐसा माना जाता था कि यहां पर घना जंगल होता था और यह शेरों का ठिकाना भी हुआ करता था और यहां पर बाद में यहां पर चोरों और लुटेरों ने भी से अपनी जगह बना लिया था। इसलिए इसका नाम चोर गुंबद पड़ा।
दोस्तों चोर गुंबद को देखने के बाद आप यहां पर बीरबल का छत्ता देखने के लिए जा सकते हैं जो इसके पास ही है और महावीर चौक पर महावीर चौक के पास जो स्थित है। नारनौल में बीरबल का छत्ता के ऐतिहासिक इमारत है जिसका निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां के शासनकाल में राय ऐ रायन मुकुंद दास ने करवाया था ।इसका नाम पहले बालमुकुंद का छत्ता था। जो बाद में बदलकर बीरबल का छत्ता कर दिया गया ।यह एक पांच मंजिला इमारत है। जिसमें कई हाल और कमरे बने हुए हैं।
बीरबल का छत्ता देखने के बाद आप यहां पर खालड़ा हनुमान मंदिर जा सकते हैं जो रघुनाथपुर गांव में स्थित है। यह हनुमान मंदिर सुंदर पहाड़ियों के बीच में बसा हुआ है। यहां रघुनाथपुरा फायरिंग रेंज भी है। काफी भव्य और सुंदर हनुमान मंदिर बना हुआ है। यहां आपको फ्री पार्किंग की सुविधा मिल जाएगी और यहां पर प्रसाद की दुकान भी लगी हुई है इसके अलावा बच्चों के लिए यहां पर झूले वगैरा की विश्वविद्यालय खाने पीने का भी यहां पर पूरा प्रबंध है। यहां पर एक बहुत सुंदर पार्क भी बनाया गया है जहां पर बैठकर आप अपना क्वालिटी टाइम बिता सकती है और यहां पर आपको हंस वगैरा और दूसरे पक्षी वगैरा भी आपके यहां पर देखने को मिल जाएंगे। हनुमान मंदिर देखने के बाद आप नारनौल की एक और ऐतिहासिक पर्यटन स्थल Dhosi की पहाड़ी पर जा सकती है जो काफी सुंदर पहाड़ी है। यह नारनौल शहर से लगभग 5 किलोमीटर दूर कुलताजपुर गांव में स्थित है।
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