"सत्य से कलियुग तक मानवता का बदलता चेहरा" | Navrang Shakti Dance 2025 | Neelesh Mehra | Narsinghpur
NEELESH MEHRA
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"सत्य से कलियुग तक मानवता का बदलता चेहरा" | Navrang Shakti Dance 2025 | Neelesh Mehra | Narsinghpur
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"सत्य से कलियुग तक मानवता का बदलता चेहरा" | Navrang Shakti Dance | Neelesh Mehra | Jawahar Kali Narsinghpur 2025
Performed By - @navrangshakti9873
Choreographer - @navrangshakti9873
Video By - @neeleshmehra1912
Edit By - @neeleshmehra1912
Place - Jawahar Kali Mandal, Sunka Chouraha , Front Of Jalgaon Jewellers, Narsinghpur (M.P.)
@nmproductionnarsinghpur6966
सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग — ये चारों युग मिलकर मानव जीवन और धर्म के परिवर्तन की पूरी कहानी बताते हैं। सत्ययुग को धर्म और सत्य का युग कहा गया है। इस समय मनुष्य ईश्वरभक्त, सत्यवादी और निष्कपट था। झूठ, पाप और अन्याय का अस्तित्व नहीं था, और धर्म अपने चारों चरणों पर स्थिर था।
त्रेतायुग में धर्म का एक भाग नष्ट हो गया। इस युग में भगवान श्रीराम ने अवतार लिया और मर्यादा, सत्य और आदर्श जीवन का उदाहरण प्रस्तुत किया। परंतु इसी समय अहंकार और अन्याय का आरंभ भी हुआ, रावण जैसे असुरों का उदय हुआ, और अधर्म ने धीरे-धीरे पैर पसारने शुरू किए।
द्वापरयुग में धर्म आधा रह गया। इस युग में भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया और महाभारत जैसे महान युद्ध के माध्यम से धर्म की रक्षा की। यह युग सत्य और असत्य, धर्म और अधर्म के संघर्ष का प्रतीक बन गया। लोग स्वार्थी और लोभी होने लगे, रिश्तों में फूट और छल का भाव बढ़ गया।
कलियुग, जो वर्तमान युग है, इसमें धर्म का केवल एक भाग शेष रह गया है। यह पाप, लोभ, ईर्ष्या और अधर्म का युग है। मनुष्य आत्मिक शक्ति से दूर होकर भौतिक सुखों में उलझ गया है। फिर भी इस युग में ईश्वर की भक्ति सबसे सरल है — केवल नामस्मरण और सच्चे भाव से की गई भक्ति ही मोक्ष का मार्ग बन सकती है।