अष्टावक्र महागीता भाग 48 | मन से मुक्ति और साक्षी भाव का रहस्य | Osho Hindi Discourse
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अष्टावक्र महागीता भाग 48 | मन से मुक्ति और साक्षी भाव का रहस्य | Osho Hindi Discourse
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क्या मनुष्य वास्तव में मन के कारण दुखी है, या अपने विचारों से जुड़ जाने के कारण? 🌿
ओशो की अष्टावक्र महागीता के भाग 48 में आत्मज्ञान, साक्षी भाव और भीतर की स्वतंत्रता जैसे गहरे आध्यात्मिक विषयों पर चिंतन करें। अष्टावक्र की दृष्टि हमें स्वयं को शरीर, मन और विचारों से अलग पहचानने की दिशा दिखाती है।
✨ इस प्रवचन से जानें:
मन और विचारों से ऊपर उठने का अर्थ
साक्षी भाव में जीने की कला
अहंकार और मोह से मुक्ति का मार्ग
सुख-दुख के बीच भीतर शांत कैसे रहें
अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानने की दिशा
सत्य बाहर खोजने की वस्तु नहीं, बल्कि स्वयं को जानने की यात्रा है। ओशो के इन विचारों को सुनें, समझें और अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें।
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