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🌾Kojagari Lakshmi Puja History:🪔बंगाल में माँ दुर्गा की विदाई के बाद ही क्यों होती है लक्ष्मी पूजा?🌾

Business Gopal

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🌾Kojagari Lakshmi Puja History:🪔बंगाल में माँ दुर्गा की विदाई के बाद ही क्यों होती है लक्ष्मी पूजा?🌾

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बंगाल में आश्विन मास की शरद पूर्णिमा पर मनाई जाने वाली कोजागरी लक्ष्मी पूजा का इतिहास और परंपरा अत्यंत अनोखी है। उत्तर भारत में जहाँ दिवाली पर लक्ष्मी पूजन होता है, वहीं बंगाल में दुर्गा पूजा के तुरंत बाद ही माँ लक्ष्मी ('लोक्खी') की पूजा की जाती है। इस वीडियो में आप जानेंगे: • 'को जागरति?' का धार्मिक रहस्य: संस्कृत शब्द 'को जागरति' का अर्थ है "कौन जाग रहा है?"। पौराणिक मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात माँ लक्ष्मी उल्लू पर सवार होकर पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जो भक्त जागकर प्रार्थना करते हैं, उन्हें सुख-समृद्धि देती हैं। कृषि संस्कृति और धान की फसल: ऐतिहासिक रूप से यह पर्व नई फसल (आमन धान) के घर आने पर फसल की देवी के प्रति आभार व्यक्त करने का उत्सव है। घर की बेटी के रूप में स्वागत: माँ दुर्गा के गमन के बाद सूने घर में माँ लक्ष्मी को बेटी मानकर चावल के घोल से बनी 'अल्पना' (Alpona) और उनके चरण-चिह्न बनाकर उनका आदरपूर्वक स्वागत किया जाता है। पारंपरिक भोग: इस पावन अवसर पर नारियल और तिल के नाड़ू, मोआ, गोविंदभोग चावल की खिचड़ी, लबड़ा और पाश का विशेष भोग लगाया जाता है। #KojagariLakshmiPuja #BengaliCulture #LokkhiPujo #SharadPurnima #LakshmiPuja #WestBengal #BengaliTraditions #IndianCulture