लगाओ मेरी नइया, सतगुरु, पार। , Bani Swami G Maharaj, RSSB
Satnam Divine
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लगाओ मेरी नइया, सतगुरु, पार। मैं बही जात, जग धार॥ १ ॥
तुम बिन नाही को कड़िहार। लगादो डूबी, खेप किनार॥ २ ॥
सहेली मत तू मन में हार। दिखाऊँ जग का वार और पार॥ ३ ॥
चढ़ाऊँ सूरत, उल्टी धार। शब्द संग खेय, उतारूँ पार॥ ४ ॥
गुरू को धर ले, हिये मँझार। नाम धुन घट में, सुन झनकार॥ ५ ॥
तरंगें उठतीं बारम्बार। भँवर जहाँ पड़ते, बहुत अपार॥ ६ ॥
मेहर से पहुँची, दसवें द्वार। राधास्वामी दीन्हा, पार उतार॥ ७ ॥