छहढाला तीसरी ढाल छंद 13 व 14 का अर्थ सहित स्वाध्याय
Ar. Manish Jain Luhadia
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छहढाला तीसरी ढाल छंद 13 व 14 का अर्थ सहित स्वाध्याय
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पिता भूप वा मातुल नृप जो, होय न तो मद ठानै। मद न रूप को, मद न ज्ञान को, धन बल को मद भानै ॥ 13 ॥
तपको मद, न मद जु प्रभुता को, करै न सो निज जानै। मद धारै तौ यही दोष वसु, समकित को मल ठानै ॥
कुगुरु-कुदेव-कुवृष-सेवक की, नहीं प्रशंस उचरै हैं। जिनमुनि जिनश्रुत बिन, कुगुरादिक तिन्हें न नमन करै हैं ।॥14॥