Hanuman Chalisa by Ajay Karki and friends
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Hanuman Chalisa by Ajay Karki and friends
103 просмотра · 7 дней назад
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On the auspicious occasion of the 45th Shiv Mandir Rising Day, held on 17th September 2026 at MGYA Hall, Electric Veng, Lunglei, a beautiful and devotional presentation of Shri Hanuman Chalisa was performed by Ajay Karki and friends.
🌺 Participants – Male:
• Ajay Karki
• Sandeep Rai
• Ajit Mukhya
• Arjun Jaishi
🌸 Participants – Female:
• Reshmi Chhetri
• Sandhya Giri
• Anita Chhetri
• Sarah Chhetri
Their soulful rendition of Hanuman Chalisa filled the celebration with devotion, spiritual energy, and the blessings of Lord Hanuman. 🙏🚩
May Lord Hanuman bless everyone with strength, courage, peace, and prosperity.
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lyrics
श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि।
वरनउँ रघुबर विमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवनकुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार॥
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥
राम दूत अतुलित बल धामा ।
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥
महावीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥
कंचन बरन बिराज सुवेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा॥
हाथ बज्र अरु ध्वजा विराजै।
काँधे मूँज जनेऊ साजै॥
शंकर सुवन केसरी नंदन।
तेज प्रताप महा जग बंदन॥
विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया॥
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे।
राम चंन्द्र के काज संवारे॥
लाय सजीवन लखन जियाये।
श्री रघुबीर हरषि उर लाये॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरत सम भाई॥
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा॥
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते।
कवि कोविद कहि सके कहाँ ते॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा॥
तुम्हरो मंत्र विभीषण माना।
लंकेश्वर भये सब जग जाना॥
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥
दु्र्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥
राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥
सब सुख लहैं तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहु को डरना॥
आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हाँक तें काँपै॥
भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महावीर जब नाम सुनावैं॥
नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥
सब पर राम तपस्वीं राजा।
तिनके काज सकल तुम साजा॥
और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै॥
चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा॥
साधु संत के तुम रखबारे।
असुर निकंदन राम दुलारे॥
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता॥
राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा॥
तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम जनम के दुख बिसरावै॥
अंत काल रघुबरपुर जाई।
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥
और देवता चित्त ना धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥
संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरैं हनुमत बलबीरा॥
जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरू देव की नाईं॥
जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बन्दि महासुख होई॥
जो यह पढै हनुमान चलीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥
पवनतनय संकट हरन,
मंगल मूरति रुप।
राम लखन सीता सहित,
हृदय बसहु सुर भूप॥
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