ऋग्वेद गायन्ति त्वा गायत्रिणः सूक्त | 12 मंत्र हिन्दी अर्थ सहित | Rigveda 1.10 Indra Suktam
Souniva
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ऋग्वेद गायन्ति त्वा गायत्रिणः सूक्त | 12 मंत्र हिन्दी अर्थ सहित | Rigveda 1.10 Indra Suktam
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ऋग्वेद का दशम सूक्त — इन्द्र सूक्त (मण्डल 1, सूक्त 10)। सभी 12 मंत्रों का संगीतमय वैदिक पाठ, हर मंत्र के बाद सरल हिन्दी अर्थ, और अन्त में "जीवन में सीख"।
Rigveda 1.10 Indra Suktam with Hindi meaning | Gayanti Tva Gayatrinah mantra | Hymn to Indra | Vedic chanting with meaning
ऋषि: मधुच्छन्दा वैश्वामित्र · देवता: इन्द्र · छन्द: अनुष्टुप्
जीवन में सीख: यजमान एक शिखर से दूसरे शिखर पर चढ़ता है — बड़ा लक्ष्य भी कदम-दर-कदम, धैर्य से मेहनत करके पूरा होता है; ईश्वर से केवल धन नहीं, उनकी मित्रता माँगें; और सच्चे मन की पुकार कभी अनसुनी नहीं जाती — "आश्रुत्कर्ण" इन्द्र सब सुनते हैं।
⏱️ अध्याय
0:00 परिचय — ऋग्वेद का दशम सूक्त
0:37 मंत्र 1 — गायन्ति त्वा गायत्रिणः
1:07 मंत्र 2 — यत्सानोः सानुमारुहत्
1:31 मंत्र 3 — युक्ष्वा हि केशिना हरी
1:52 मंत्र 4 — एहि स्तोमाँ अभि स्वर
2:10 मंत्र 5 — उक्थमिन्द्राय शंस्यम्
2:29 मंत्र 6 — तमित्सखित्व ईमहे
2:47 मंत्र 7 — सुविवृतं सुनिरजम्
3:06 मंत्र 8 — नहि त्वा रोदसी उभे
3:25 मंत्र 9 — आश्रुत्कर्ण श्रुधी हवम्
3:43 मंत्र 10 — विद्मा हि त्वा वृषन्तमम्
4:01 मंत्र 11 — आ तू न इन्द्र कौशिक
4:16 मंत्र 12 — परि त्वा गिर्वणो गिरः
4:35 जीवन में सीख
5:06 समापन — Subscribe 🙏
📜 पाठ-स्रोत: संस्कृत विकिस्रोत (ऋग्वेदः सूक्तं १.१०), GRETIL से मिलान। व्याख्या: सायण भाष्य के आधार पर।
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