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कुछ दूरियाँ दोस्तों में भी आ जाती हैं | दोस्ती और बिछड़ने पर दिल छू लेने वाली ग़ज़ल

सुरों की विरासत

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कुछ दूरियाँ दोस्तों में भी आ जाती हैं | दोस्ती और बिछड़ने पर दिल छू लेने वाली ग़ज़ल

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सुरों की विरासत
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कुछ दूरियाँ दोस्तों में भी आ जाती हैं... दोस्ती और जुदाई पर एक ख़ूबसूरत ग़ज़ल [आग़ाज़ – धीमी आवाज़ में] कभी जिनके बिना एक शाम भी कटती नहीं थी, आज उनसे बात किए कई महीने गुज़र जाते हैं... [मुखड़ा] कुछ दूरियाँ दोस्तों में भी आ जाती हैं, कुछ ख़ामोशियाँ रिश्तों को खा जाती हैं... न कोई शिकवा है, न कोई शिकायत उनसे, बस ज़िंदगी रास्ते अलग कर जाती है... [अंतरा 1] वो चाय की दुकानें, वो घंटों की बातें, वो छोटी-सी बातों पे हँसना-हँसाना... वो बेवजह मिलना, वो बेवजह रूठना, वो रूठे हुए दोस्त को फिर से मनाना... न जाने कहाँ खो गईं वो महफ़िलें, अब यादें ही अक्सर बुला जाती हैं... कुछ दूरियाँ दोस्तों में भी आ जाती हैं... [अंतरा 2] कभी एक आवाज़ पर दौड़े चले आते थे, कभी अपनी परेशानियाँ भी साथ लाते थे... न दिन का पता था, न रातों की ख़बर थी, हम दोस्त थे, बस दोस्ती निभाते थे... अब फ़ुर्सत नहीं है किसी के पास शायद, मगर यादें कहाँ फ़ुर्सत माँग पाती हैं... [अंतरा 3] किसी को नौकरी ने शहर से दूर किया, किसी को ज़िम्मेदारियों ने मजबूर किया... किसी के घर में अब बच्चे बड़े हो गए, किसी ने वक़्त के हाथों ख़ुद को बदल लिया... मगर दिल के किसी कोने में आज भी, वो पुरानी शरारतें मुस्कुराती हैं... [अंतरा 4] कभी मिलना हो तो बस इतना कहना, कि अब भी वो यारी दिल में बसी है... न मिलने का मतलब भुलाना नहीं है, ये दूरी कोई दुश्मनी तो नहीं है... कुछ रिश्ते मुलाक़ातों के मोहताज नहीं, वो दूर रहकर भी दिल में जगह बनाती हैं... [अंतरा 5 – भावुक अंदाज़] अगर कभी गुज़रो उस पुरानी गली से, तो मेरी तरफ़ से उसे याद कर लेना... वो बेंच, वो नुक्कड़, वो चाय का प्याला, कुछ पल वहाँ बैठकर आँखें भर लेना... कहना कि एक दोस्त था तुम्हारा कभी, जो आज भी तुम्हारी कमी महसूस करता है... [अंतिम मुखड़ा – संगीत के साथ] कुछ दूरियाँ दोस्तों में भी आ जाती हैं, कुछ ख़ामोशियाँ रिश्तों को खा जाती हैं... न कोई शिकवा है, न कोई शिकायत उनसे, बस ज़िंदगी रास्ते अलग कर जाती है... [समापन – बहुत धीमी आवाज़] दोस्त अगर कभी ये ग़ज़ल सुन रहे हो, तो समझना तुम्हें ही पुकारा है हमने... मुलाक़ात हो या न हो इस ज़िंदगी में, तुम्हें आज भी अपना माना है हमने...