✨ Most Powerful Devi Mantra || सिद्ध कुंजिका स्तोत्रम् || Siddha kunjika stotram by Sujeet vadraj
Swami Vedraj
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✨ Most Powerful Devi Mantra || सिद्ध कुंजिका स्तोत्रम् || Siddha kunjika stotram by Sujeet vadraj
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Siddh Kunjika Stotram: बहुत चमत्कारी है सिद्ध कुंजिका स्तोत्र, मनोकामना पूर्ति के लिए जरूर करें इसका पाठ
सार
Siddh Kunjika Stotram: सिद्ध कुंजिका स्तोत्र को परम कल्याणकारी माना गया है। मान्यता है कि इस स्तोत्र का पाठ करने से मनुष्य को चमत्मकारिक रूप से कष्टों से मुक्ति मिलती है।
Path karane ka samay na ho to sune jarur aur guru ke bina aadesh ke path na kare hari om
सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम्॥
शिव उवाच
शृणु देवि प्रवक्ष्यामि, कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्।
येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत॥१॥
न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम्।
न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम्॥२॥
कुञ्जिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत्।
अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम्॥३॥
गोपनीयं प्रयत्नेन स्वयोनिरिव पार्वति।
मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम्।
पाठमात्रेण संसिद्ध्येत् कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्॥४॥
॥अथ मन्त्रः॥
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ ग्लौ हुं क्लीं जूं स:
ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल
ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा।''
॥इति मन्त्रः॥
नमस्ते रूद्ररूपिण्यै नमस्ते मधुमर्दिनि।
नमः कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दिनि॥१॥
नमस्ते शुम्भहन्त्र्यै च निशुम्भासुरघातिनि॥२॥
जाग्रतं हि महादेवि जपं सिद्धं कुरूष्व मे।
ऐंकारी सृष्टिरूपायै ह्रींकारी प्रतिपालिका॥३॥
क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोऽस्तु ते।
चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी॥४॥
विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मन्त्ररूपिणि॥५॥
धां धीं धूं धूर्जटेः पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी।
क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवि शां शीं शूं मे शुभं कुरु॥६॥
हुं हुं हुंकाररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी।
भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः॥७॥
अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं
धिजाग्रं धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा॥
पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खूं खेचरी तथा॥८॥
सां सीं सूं सप्तशती देव्या मन्त्रसिद्धिं कुरुष्व मे॥
इदं तु कुञ्जिकास्तोत्रं मन्त्रजागर्तिहेतवे।
अभक्ते नैव दातव्यं गोपितं रक्ष पार्वति॥
यस्तु कुञ्जिकाया देवि हीनां सप्तशतीं पठेत्।
न तस्य जायते सिद्धिररण्ये रोदनं यथा॥
इति श्रीरुद्रयामले गौरीतन्त्रे शिवपार्वतीसंवादे कुञ्जिकास्तोत्रं सम्पूर्णम्।
॥ॐ तत्सत्॥
Sujeet pandit ji
कुंजिका स्तोत्र अत्यंत गुप्त और शक्तिशाली माना जाता है, और इसे बिना किसी गुरु की अनुमति के पाठ करना उचित नहीं होता, क्योंकि यह स्तोत्र दुर्गा सप्तशती के समान ही प्रभावशाली है। सही मार्गदर्शन के बिना इसे करना हानिकारक हो सकता है, इसलिए गुरु की अनुमति और मार्गदर्शन बहुत आवश्यक है। आइए, इसे शुद्ध और विधिपूर्वक करने का तरीका जानें ताकि आप इसे दूसरों को भी सही ढंग से बता सकें।
कुंजिका स्तोत्र पाठ विधि:
1. गुरु से आज्ञा:
सबसे पहले, अपने गुरु से अनुमति लें। यह स्तोत्र अत्यधिक शक्तिशाली है, और सही मार्गदर्शन और आशीर्वाद से इसका सही प्रभाव प्राप्त होता है।
2. पवित्रता का पालन:
पाठ करने से पहले स्वयं को शुद्ध रखें। स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें, और एक शांत व स्वच्छ स्थान का चयन करें जहाँ ध्यान भटकाने वाली कोई वस्तु न हो।
3. आसन:
पाठ करते समय कुशासन या सफेद कपड़े का आसन प्रयोग करें। इससे स्थिरता और ऊर्जा संतुलित रहती है।
4. माँ दुर्गा का ध्यान:
माँ दुर्गा का ध्यान करें। पहले दुर्गा सप्तशती के किसी सूक्त या मंत्र का संक्षिप्त जप करें। फिर माँ दुर्गा के सामने दीपक और धूप जलाएं। माँ की प्रतिमा या चित्र के सामने बैठें।
5. प्रणाम और संकल्प:
पाठ शुरू करने से पहले माँ दुर्गा को प्रणाम करें और यह संकल्प लें कि आप कुंजिका स्तोत्र का पाठ माँ के आशीर्वाद और अपने कल्याण के लिए कर रहे हैं।
6. कुंजिका स्तोत्र का पाठ:
शांत मन से और पूरी श्रद्धा के साथ कुंजिका स्तोत्र का पाठ करें। इस स्तोत्र का उच्चारण स्पष्ट और शुद्ध होना चाहिए। मंत्रों का शुद्ध उच्चारण करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह मंत्रशक्ति पर आधारित है।
7. नियमितता:
पाठ को नियमित रूप से करने का संकल्प लें। एक दिन का पाठ अधूरा नहीं होना चाहिए। इसे जितने दिनों तक करने का संकल्प लिया हो, उसे पूरा करना चाहिए।
8. समापन और आरती:
पाठ समाप्त करने के बाद माँ दुर्गा की आरती करें और प्रसाद चढ़ाएं। यदि संभव हो, तो गुरु को या किसी योग्य ब्राह्मण को भी प्रसाद का हिस्सा दें।
9. भोजन और व्यवहार:
पाठ के दौरान सात्विक भोजन करें और मानसिक शुद्धता बनाए रखें। अहंकार, क्रोध, और गलत आचरण से बचें।
ध्यान दे
1. गुरु का महत्व
सबसे पहले गुरु से अनुमति लेना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके बिना इस स्तोत्र का पाठ नहीं करना चाहिए।
2. सही उच्चारण पर जोर:
जब आप दूसरों को सिखाएं, तो सुनिश्चित करें कि वे शुद्ध उच्चारण के साथ मंत्रों का पाठ करें। इसके लिए अभ्यास करे और सही स्वर और गति में पाठ सीखें
3. श्रद्धा और नियम पालन:
कुंजिका स्तोत्र का पाठ पूरी श्रद्धा और नियमबद्ध तरीके से करना चाहिए। नियमों का पालन न करने से अनिष्ट फल भी हो सकते हैं।
4. सकारात्मक दृष्टिकोण
पाठ करने वाले व्यक्ति का दृष्टिकोण सकारात्मक होना चाहिए। किसी भी प्रकार की नकारात्मकता से दूर रहें।
आप इस प्रकार कुंजिका स्तोत्र का सही और शुद्ध तरीक़े से आप सभी पाठ करे जिससे आप सभी भी इसका लाभ सही रूप से प्राप्त कर सकें।