350 एकड़ में प्राकृतिक खेती और ₹3000/kg बिकता है घी : 200 गोवंश से कमाई का ये गौशाला मॉडल देखिए
Gaon Junction
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350 एकड़ में प्राकृतिक खेती और ₹3000/kg बिकता है घी : 200 गोवंश से कमाई का ये गौशाला मॉडल देखिए
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बांदा के खेरवा गांव में विज्ञान शुक्ला करीब 200 पशुओं के साथ गौशाला चला रहे हैं और 350 एकड़ पुश्तैनी जमीन पर प्राकृतिक व जैविक खेती करते हैं। देसी गायों के दूध से घी तैयार किया जाता है, जबकि गोबर और गौमूत्र से जीवामृत, घन जीवामृत, जैविक कीटनाशक और वर्मीकम्पोस्ट बनाया जाता है। सालाना 300-350 क्विंटल अतिरिक्त वर्मीकम्पोस्ट सरकारी विभागों, नर्सरी और किसानों को ₹10 प्रति किलो तक के भाव पर बेची जाती है। अब गौशाला में बायोगैस प्लांट भी तैयार हो रहा है, जिससे गैस के साथ जैविक खाद के लिए स्लरी मिलेगी। जानिए कैसे पशुपालन, प्राकृतिक खेती और जैविक इनपुट को जोड़कर यह मॉडल तैयार किया गया है।
गांव जंक्शन के लिए शैलेश अरोड़ा की रिपोर्ट..
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HIGHLIGHTS
150-175 देसी गोवंश और 15 भैंसों से सफल गौशाला का संचालन
350 एकड़ पुश्तैनी जमीन पर 100% प्राकृतिक और जैविक खेती
देसी गाय का दूध नहीं बिकता, सीधे ₹3000/kg पर बिकता है घी
गोबर और गौमूत्र से जीवामृत, घन जीवामृत और जैविक कीटनाशक तैयार
बची हुई केंचुआ खाद (वर्मीकम्पोस्ट) ₹10/kg के भाव से सरकारी विभागों को बिक्री
सालाना 300-350 क्विंटल अतिरिक्त वर्मीकम्पोस्ट की होती है बिक्री
गौशाला में बन रहा है बायोगैस प्लांट, मिलेगी गैस और उत्तम खाद (स्लरी)
जानवरों को खुला छोड़ने से दूध उत्पादन में वृद्धि और खर्च में कमी
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