एक कचोरी दो समोसा -इन मर्दों का क्या भरोसा | Ek Kachori 2 Samosa En Mardo Ka KYa BHarosa ,Viral Song
Rajasthani SurSagar
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एक कचोरी दो समोसा -इन मर्दों का क्या भरोसा | Ek Kachori 2 Samosa En Mardo Ka KYa BHarosa ,Viral Song
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Rajasthani SurSagar
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एक कचोरी दो समोसा -इन मर्दों का क्या भरोसा | Ek Kachori 2 Samosa En Mardo Ka KYa BHarosa ,Viral Song
एक कचोरी दो समोसा
इन मर्दों का क्या भरोसा
एक सुठा दो चाय
मर्द जात हाय हाय
ठंडे समोसे गर्म करो
मर्द जात शर्म करो
मेरी बहन हर मर्द गलत नहीं होता
तेरा भाई तेरा बाप वो भी क्या गलत है
एक कचोरी दो समोसा
मेरे मर्द पे है भरोसा
सलवार पहनो या कमीज
मेरे भाइयो में है तमीज
दर्द न मिटता किसी बाम के
मेरे घर के सभी मर्द है काम के
एक किलो आलू, दो किलो आटा,
इन मर्दों में तेरा बाप भी आता!
दिल्ली वाली बोली—मर्दों से बचना,
हमने कहा—गलत से ही बचना!
कोई करे बुरा, तो नाम उसी का,
सबको दोषी कहना काम नहीं जी!
भाई हो, बेटा हो या हो पिता,
रिश्ता हर एक का होता है अपना,
गलत करे जो, उसको रोकना,
पर सही इंसान को क्यों टोकना?
मर्दों में क्या सब एक जैसे?
बोलो बहना—क्या सब वैसे?
औरतों में भी फर्क हजार,
फिर क्यों सबका एक ही व्यवहार?
गलत को गलत बताना ठीक,
पर नफरत से क्या होगा ठीक?
एक कचोरी, दो समोसा,
बातों का भी क्या भरोसा!
एक किलो आलू, दो किलो आटा,
सच के आगे कौन टिक पाता!
ना मर्द विरोध, ना औरत विरोध,
गलत सोच के खिलाफ विरोध!
जो अच्छा है उसको मान,
जो गलत है उसको पहचान!
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