।।जो मोहि राम लागते मीठे श्री श्री 1008 श्री स्वामी सच्चिदानंद जी महाराजजी केश्री मुख से अमृत वचन।।
ParamhansDarbar परमहंस दरबार
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।।जो मोहि राम लागते मीठे श्री श्री 1008 श्री स्वामी सच्चिदानंद जी महाराजजी केश्री मुख से अमृत वचन।।
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जो मोहि राम लागते मीठे।
तौ नवरस, षटरस-रस अनरस ह्वै जाते सब सीठे॥१॥
बंचक बिषय बिबिध तनु धरि अनुभवे, सुने अरु डीठे।
यह जानत हौं हृदय आपने सपने न अघाइ उबीठे॥२॥
तुलसीदास प्रभु सो एकहिं बल बचन कहत अति ढीठे।
नामकी लाज राम करुनाकर केहि न दिये कर चीठे॥३॥