Перейти к содержимому

कृष्ण ने राधा को दिखाया उनसे प्रेम करने वाली गोपिकाओं की वास्तविकता | Shri Krishna Jeevani

Tilak

0:00 / 0:00

कृष्ण ने राधा को दिखाया उनसे प्रेम करने वाली गोपिकाओं की वास्तविकता | Shri Krishna Jeevani

145 146 просмотров · 1 г. назад
Tilak
40,7 млн подписчиков
145 146 просмотров · 1 г. назад
राधा और कृष्ण का प्रेम राधा की सखियों और कृष्ण को सखाओं से भी नहीं छुपा रहता है, वे उनकी इस प्रेम लीला में साथ देने लगते है। एक दिन बरसाना वालों और गोकुल वालों की पंचायत में निर्णय होता है कि इस बार होली गोकुल में होगी। बरसाने की होली में महिलाएं पुरुषों को लट्ठ से पीटती है, इसलिए राधा और उनकी सखियाँ कृष्ण और उनके सखाओं से कहती है कि वे गोकुल में भी आकर उनको पीट सकती है। इस पर कृष्ण कहते है कि बरसाने की छोरियों से पीटने में भी आनंद आता है। होली का दिन भी आता है, रंगों से सराबोर सभी फाग गीत गाते हुए एक-दूसरे को रंग डालकर और गुलाल लगाकर होली का आनंद लेते है। तो वही आकाश में विराजमान भगवान श्री कृष्ण और राधा जी भी होली के इन दृश्यों का आनंद उठाते है। रंग खेलने के उपरांत सभी यमुना के तट पर स्नान करते समय हार और जीत की चर्चा का भी आनंद उठाते है। राधा और कृष्ण की प्रेम लीला चलती रहती है, इसमें राधा की सखियाँ में पहरा देकर उसका साथ देती है। लेकिन वास्तव में वे सखियाँ भी मन ही मन कृष्ण से प्रेम करती है। राधा को कृष्ण से छुप-छुप कर मिलने में भय लगता है, लेकिन कृष्ण को नहीं। इसलिए राधा कहती है कि पुरुषों को भय नहीं लगता। यदि वह राधा होते और मैं कृष्ण तब समझ में आता। वह अपने इस भाव को समझाने के लिए अपने साथ लाए हुई घाघरा-चोली कृष्ण को पहना देती है और स्वयं कृष्ण का मोर मुकुट पहन कर कृष्ण बन जाती है। स्त्री के कपड़े पहने कृष्ण कहते है कि अब वह पूरी तरह से राधा बन गए है, तो राधा कहती है कि पूरी नहीं, क्योंकि इसमें राधा की पीड़ा नहीं है। आकाश से यह दृश्य देख रही राधा रानी भी भगवान कृष्ण से कहती है कि मेरे प्रेम का ऋण है आप पर, जिसे आप कभी नहीं उतार सकते। भगवान श्री कृष्ण कहते है कि हम अलग नहीं है, हममें कोई भेद नहीं है। राधा रानी भगवान कृष्ण के शब्दों जाल में उलझती ही जाती है। एक दिन राधा कृष्ण से कहती है कि उसे भी मुरली बजाना सीखा दे और वह कृष्ण की मुरली लेने लगती है। कृष्ण राधा को रोकते हुए कहते है कि यह कृष्ण की मुरली है, जो पूरे ब्रह्माण्ड को जगा देगी और प्रेम की प्यासी कितनी ही आत्माएं मुरली के सुरों बंध कर खिंची चली आएंगी, उन्हें संभालना तुम्हारे वश में नहीं। राधा कहती है कि उसके जैसे कोई और प्रेम नहीं कर सकता। वह कृष्ण के चारों ओर एक घेरा खींच देती है और कहती है बजाओ मुरली, इस घेरे में अंदर वही आ सकेगी, जो मेरे जैसा प्रेम करती होगी अन्यथा यहीं भस्म हो जाएगी। कृष्ण मुरली बजाना प्रारम्भ करते है, मुरली की धुन सुनकर कृष्ण से प्रेम करने वाली सभी गोपियाँ खिंची चली आती है और उन्हें आता देख राधा उस घेरे में आग लगा देती है। लेकिन उस आग का उन गोपियाँ पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, वे सभी घेरे के अंदर आ जाती है। राधा को ग्लानि होने लगती है, तो कृष्ण राधा को उन गोपियाँ के वास्तविक रूप दिखाते है, तो उसे सभी में राधा की छवि दिखाई देती है। कृष्ण कहते है कि इन सभी में मैं तुम्हारा ही रूप देखता हूँ। सम्पूर्ण जगत में भगवान विष्णु के आठवें अवतार एवं सोलह कलाओं के स्वामी भगवान श्री कृष्ण काजीवन धर्म, भक्ति, प्रेम, और नीति का अद्भुत संगम है। वसुदेव और देवकी के पुत्र के रूप में कारागार में जन्म लेकर गोकुल की गलियों में यशोदा और नंदबाबा के यहाँ पलने वाले, अपनी लीलाओं, जैसे पूतना वध, माखन चोरी, राधा के संग प्रेम, गोपियों के साथ रासलीला और कालिया नाग के दमन के लिए प्रसिद्ध श्री कृष्ण ने युवावस्था में मथुरा कंस का वध करके जनमानस को उसके अत्याचार से मुक्त कराया एवं स्वयं के लिए द्वारका नगरी स्थापना भी की। उनका जीवन केवल लीलाओं तक सीमित नहीं था। उन्होंने समाज को धर्म और कर्म का गूढ़ संदेश देने के लिए महाभारत के युद्ध में पांडवों का मार्गदर्शन किया और अर्जुन के सारथी बनकर उसे "श्रीमद्भगवद्गीता" का उपदेश दिया, जो आज भी जीवन की समस्याओं का समाधान बताने वाला महान ग्रंथ माना जाता है। श्री कृष्ण का जीवन प्रेम, त्याग, और नीति का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। आपका प्रिय चैनल "तिलक" श्री कृष्ण के जीवन से जुड़ा यह विशेष संस्करण "श्री कृष्ण जीवनी" आपके समक्ष प्रस्तुत है, जिसमें भगवान श्री कृष्ण के जीवन से जुड़ी कथाओं का संकलन किया गया है। भक्ति भाव से इनका आनन्द लीजिए और तिलक से जुड़े रहिए। #tilak #krishna #shreekrishna #shreekrishnajeevani #krishnakatha