TRILOKPUR STORY : नमक की बोरी में त्रिलोकपुर आई थी माँ बाला सुंदरी, देखिये पूरी वीडियो
HIND HIMACHAL
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TRILOKPUR STORY : नमक की बोरी में त्रिलोकपुर आई थी माँ बाला सुंदरी, देखिये पूरी वीडियो
हिमाचल प्रदेश जिला सिरमौर के मुख्यालय नाहन से करीब 23 किलोमीटर दूर, शिवालिक पहाड़ियों के बीच महामाया बालासुंदरी का भव्य और दिव्य मंदिर त्रिलोकपुर नाम से जाना जाता है करीब 450 साल पुराने उत्तर भारत के इस ऐतिहासिक शक्तिधाम से हिमाचल सहित पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड सहित उत्तर भारत के लाखों लोगों की आस्थायें जुड़ी हुई हैं।
त्रिलोकपुर के माता बालासुंदरी मंदिर में हर वर्ष दो बार चैत्र और अश्वनी महीने के नवरात्रि के अवसर पर नवरात्र में मेलों का आयोजन किया जाता है। चैत्र नवरात्र के अवसर पर होने वाले मेले को यहां बड़ा मेला और अश्वनी महीने के नवरात्र पर होने वाले मेले को छोटा मेला कहा जाता है।इस वर्ष चैत्र नवरात्र का मेला 22 मार्च से 6 अप्रैल 2023 तक आयोजित किया जा रहा है।
महामाया बालासुंदरी के मंदिर के इतिहास की बात करें तो
सन् 1573 ईसवी में सरमौर जिले में नमक की कमी हो गई थी। ज्यादातर नमक देवबंद नामक स्थान से लाना पड़ता था। देवबंद वर्तमान में उत्तर प्रदेश के जिला सहारनपुर का ऐतिहासिक कस्बा है। कहा जाता है कि लाला राम दास सदियों पहले त्रिलोकपुर में नमक का व्यापार करते थे, उनकी नमक की बोरी में माता देवबंद से यहां आई थी।
भगत राम दास की दुकान त्रिलोकपुर में पीपल के पेड़ के नीचे हुआ करती थी। भगत राम दास देवबंद से लाया नमक बेचा करते रहे, लेकिन काफी समय के बाद भी नमक हुआ । भगत को नमक बेचकर काफी धन प्राप्त हुआ।
भगत उस पीपल के पेड़ के नीचे सुबह-शाम दिया जलाते और पूजा-अर्चना करते थे। इसी बीच माता बालासुंदरी ने खुश होकर एक रात भगत को सपने में दर्शन दिए और कहा कि भक्त मैं तुम्हारी भक्ति भाव से अति प्रसन्न हूं, मैं यहां पीपल वृक्ष के नीचे पिंडी रूप में विराजमान हूं, तुम मेरा यहां पर भवन बनवाओ।
मां बालासुसंदरी के दिव्य दर्शन के उपरांत भगत जी को भवन निर्माण की चिंता सताने लगी। सपने में भगत जी ने माता का आह्वान किया और विनती की कि इतने बड़े भवन निर्माण के लिए मेरे पास सुविधाओं व धन की कमी है। उन्होंने माता से आग्रह किया कि आप सिरमौर के महाराज को भवन निर्माण का आदेश दें।
माता ने सिरमौर नरेश राजा दीप प्रकाश को सोते समय सपने में दर्शन देकर भवन निर्माण का आदेश दिया। सिरमौर नरेश प्रदीप प्रकाश ने तुरंत जयपुर से कारीगरों को बुलाकर भवन निर्माण का कार्य पूरा करवाया ।
हालांकि मां बाला सुंदरी के नमक की बोरी में देवबंद से त्रिलोकपुर आने की किवदंती अधिक प्रचारित है, लेकिन मंदिर परिसर में सूचना बोर्ड में उद्वृत इतिहास, एक दूसरी किवदंती की जानकारी को भी उल्लेखित करता है।
भक्तों का मां बालासुंदरी पर अटूट विश्वास और श्रद्धा है। त्रिलोकपुर स्थित शक्ति धाम में माता त्रिपुरी बालासुंदरी साक्षात रूप में विराजमान है। यहां पर की गई मनोकामनाएं जरूर पूरी होती हैं भगतों सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।