मैं(शिव)न पूज्य बनता हूँ, न पुजारी, तो फिर शिवलिंग किसकी यादगार? परमब्रह्म कौन है? VCD 2403
अध्यात्म विद्या रहस्य
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मैं(शिव)न पूज्य बनता हूँ, न पुजारी, तो फिर शिवलिंग किसकी यादगार? परमब्रह्म कौन है? VCD 2403
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#ब्रह्मवाक्य मुरली में आया--मैं(#शिव)न पूज्य बनता हूँ, न पुजारी, तो फिर #शिवलिंग किसकी यादगार? #परमब्रह्म कौन है?
अरे!कितना लंबा टाइम हो गया परम ब्रह्म की बात बताते बताते। शास्त्रों में भी बताई है--"गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरु देवो महेश्वर गुरु साक्षात परम ब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नमः"। उस परमब्रह्म गुरु को नमन करता हूँ। शिव बाबा भी कहते हैं--माता गुरु को जरूर मानना पड़ेगा। तो माताओं में वो पहली माता कौन है? जो परम ब्रह्मा है, वो बड़ी ब्रह्मा बड़ी माता है। तो जैसे शिव दादा लेखराज में आते हैं, तो कहते हैं मैं इनका नाम ब्रह्मा रखता हूँ। ऐसे ही प्रजापिता में पहले-पहले आए और क्या नाम रखा काम निकालने के लिए? ब्रह्मा नाम रखा तो पहला-पहला ब्रह्मा हुआ।
बड़े ते बड़ा ब्रह्मा जो सृष्टि रूपी परिवार है परमपिता का वो रचने के लिए उस परमपिता ने पहली पहली माता परममाता परमब्रह्म कहो वो निर्धारित की काम निकालने के लिए। यह टाइटल क्यों दिया? परम ब्रह्म का टाइटल क्यों दिया? क्योंकि शास्त्रों में जितने भी नाम है वो काम के आधार पर है। तो क्या काम किया? अरे माता क्या करती है? सृष्टि की जो भी प्राणी मात्र हैं जो भी बच्चे हैं उन सब की पालना करेगी ना करती है ना तो नई सृष्टि की पालना करने के लिए जिस तन को निमित्त बनाया पहले पहले माता बनाया तो इसलिए मंदिर में जाते हैं शिवलिंग के
सामने तो शिवलिंग एक है या दो है? अरे शिवलिंग एक है मंदिर में या दो चार हैं? एक है। एक के सामने जाके कहेंगे त्वमेव माता च पिता त्वमेव तू ही मेरी माता है। तू ही मेरा माता है, तू ही पिता है। माता है बड़ा रूप। पत्थर, पत्थर बुद्धि। क्या है? पत्थर बुद्धि माता है और चैतन्य उसमें बिंदु वो पिता है। वो बिंदु सदैव चैतन्य था। जिसकी सात्विक यादगार सोमनाथ के मंदिर में द्वापर के आदि में दिखाई गई। उससे पहले तो कोई सात्विक यादगार बनी नहीं थी। तो सोमनाथ मंदिर में जो शिवलिंग बनाया गया जिसके बीच में हीरा रखा हुआ था वो हीरा किसकी यादगार है?
शिव की यादगार तो हो नहीं सकती क्योंकि शिव स्वयं ही ब्रह्म वाक्य में बोलता है कि ना मैं पूज्य बनता हूं ना पुजारी बनता हूं मैं आत्मा तो हूं निराकार तो हूं ज्योति स्वरूप तो हूं हीरे के समान ही ज्योति स्वरूप नहीं कहेंगे क्योंकि हीरा तो पत्थर है और शिव कभी पत्थर बनता ही नहीं ज्योति बनाना ज्योतिर्लिंगम तो हूं ज्योति का ज्योति स्वरूप तो हूं लेकिन ज्योति लिंगम नहीं हूं। लिंगम माने निशान। माने वो निशान नहीं हूँ,वो मैं वो यादगार नहीं हूँ।
VCD 2403