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🕯️ माँ की आखिरी निशानी | पितृपक्ष में बेटे ने निभाया अपना वचन | भावुक कहानी

श्री जी

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🕯️ माँ की आखिरी निशानी | पितृपक्ष में बेटे ने निभाया अपना वचन | भावुक कहानी

4 просмотра · 4 дн. назад
श्री जी
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🙏 जय पितृ देव 🙏 यह कहानी है एक बेटे मोहन की, जिसने अपनी माँ से किया हुआ एक छोटा-सा वादा पितृपक्ष में निभाया। माँ ने अपने जीवन के अंतिम दिनों में मोहन को एक पुरानी पूजा-थाली सौंपते हुए कहा था कि वह पितृपक्ष में अपने माता-पिता और पूर्वजों को कभी न भूले। समय बीतता गया और जिंदगी की भागदौड़ में मोहन माँ की बात भूलने लगा। लेकिन पितृपक्ष आते ही उसे माँ की आखिरी निशानी और उसका दिया हुआ वचन याद आ गया। इसके बाद मोहन गाँव लौटता है और अपनी माँ की परंपरा के अनुसार पितरों का स्मरण, तर्पण और जरूरतमंदों को भोजन कराता है। यह कहानी हमें सिखाती है कि माता-पिता की सबसे बड़ी निशानी उनकी संपत्ति नहीं, बल्कि उनके दिए हुए संस्कार होते हैं। ❤️ 🌿 कहानी से सीख: • अपने माता-पिता का सम्मान करें। • अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करें। जरूरतमंदों की सहायता करें। • परिवार के अच्छे संस्कारों को आगे बढ़ाएं। अगर कहानी आपको पसंद आए तो Like 👍, Share ↗️ और Subscribe 🔔 जरूर करें। ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः। 🙏🪔 #pitradoshnivaran #pitripaksha #garudpuran #vishnu #vishnupuran #pinddan #hinduism #hindumythology #hindumotivation #shiv #bihar #lokgeet #lokkahani #lokkatha #jitiya #jitiyaspecial #2026