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Uvasaggaharam Stotra 27 Times | उवसग्गहरं स्तोत्र | Parshvanath Stotra | Positive Energy | Relax

Stutiam - Jain Bhajans, Meditation, Motivation

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Uvasaggaharam Stotra 27 Times | उवसग्गहरं स्तोत्र | Parshvanath Stotra | Positive Energy | Relax

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श्री उवसग्गहरं स्तोत्र – 27 बार | Shri Uvasaggaharam Stotra 27 Times | Jain Stotra श्री पार्श्वनाथाय नमः 🙏 उवसग्गहरं स्तोत्र श्रुतकेवली आचार्य श्री भद्रबाहु स्वामी द्वारा रचित, भगवान श्री पार्श्वनाथ की स्तुति में प्राकृत भाषा का एक प्राचीन और अत्यंत लोकप्रिय जैन स्तोत्र है। "उवसग्गहरं" का अर्थ है – उपसर्ग (विघ्न-बाधाएँ) हरने वाले। जैन परंपरा में इसका पाठ श्रद्धा और भक्ति के साथ किया जाता है। Uvasaggaharam Stotra is an ancient Prakrit hymn composed by Acharya Shri Bhadrabahu Swami in praise of Bhagwan Parshvanath, the 23rd Tirthankara. "Uvasaggaharam" means "the remover of upasarg (obstacles and troubles)". This video presents the complete stotra repeated 27 times for jaap and meditation. श्रद्धा से पाठ करने के लाभ (पारंपरिक मान्यता): • जीवन के उपसर्ग और विघ्न दूर होते हैं • ग्रह-बाधा, रोग और महामारी से रक्षा (गाथा 2) • प्रभु को प्रणाम मात्र से दुःख और दरिद्रता दूर (गाथा 3) • चिंतामणि से श्रेष्ठ सम्यक्त्व की प्राप्ति (गाथा 4) • भव-भव में बोधि और मोक्ष-मार्ग का लाभ (गाथा 5) 🎧 कैसे सुनें | How to listen: शांत स्थान पर बैठें, आँखें बंद करें और भगवान पार्श्वनाथ का ध्यान करते हुए साथ-साथ पाठ करें या मन ही मन जाप करें। सुबह, संध्या या किसी भी शुभ कार्य से पहले सुनें। हेडफ़ोन के साथ सुनने पर अनुभव और गहरा होता है। Sit in a quiet place, close your eyes and chant along or listen with devotion. Ideal for morning/evening prayer, daily jaap, meditation and before any auspicious beginning. ⏱️ अवधि | Duration: 1:33:54 (27 पाठ | 27 repetitions) 📿 अध्याय | Chapters: 0:00:00 परिचय | Intro 0:00:12 जाप 1 | Jaap 1 0:03:40 जाप 2 | Jaap 2 0:07:09 जाप 3 | Jaap 3 0:10:37 जाप 4 | Jaap 4 0:14:05 जाप 5 | Jaap 5 0:17:33 जाप 6 | Jaap 6 0:21:01 जाप 7 | Jaap 7 0:24:30 जाप 8 | Jaap 8 0:27:58 जाप 9 | Jaap 9 0:31:26 जाप 10 | Jaap 10 0:34:54 जाप 11 | Jaap 11 0:38:22 जाप 12 | Jaap 12 0:41:51 जाप 13 | Jaap 13 0:45:19 जाप 14 | Jaap 14 0:48:47 जाप 15 | Jaap 15 0:52:15 जाप 16 | Jaap 16 0:55:43 जाप 17 | Jaap 17 0:59:12 जाप 18 | Jaap 18 1:02:40 जाप 19 | Jaap 19 1:06:08 जाप 20 | Jaap 20 1:09:36 जाप 21 | Jaap 21 1:13:04 जाप 22 | Jaap 22 1:16:33 जाप 23 | Jaap 23 1:20:01 जाप 24 | Jaap 24 1:23:29 जाप 25 | Jaap 25 1:26:57 जाप 26 | Jaap 26 1:30:25 जाप 27 | Jaap 27 📜 उवसग्गहरं स्तोत्र | Lyrics: [गाथा 1] उवसग्गहरं पासं, पासं वंदामि कम्मघण-मुक्कं । विसहर-विस-निन्नासं मंगल-कल्लाण-आवासं ॥ मंगल-कल्लाण-आवासं ॥ उवसग्गहरं पासं, पासं वंदामि कम्मघण-मुक्कं । [गाथा 2] विसहर-फुल्लिंग-मंतं कंठे धारेइ जो सया मणुओ । तस्स गह-रोग-मारी, दुट्ठ-जरा जंति उवसामं ॥ दुट्ठ-जरा जंति उवसामं ॥ उवसग्गहरं पासं, पासं वंदामि कम्मघण-मुक्कं । [गाथा 3] चिट्ठउ दूरे मंतो, तुज्झ पणामो वि बहुफलो होइ । नर तिरिएसु वि जीवा, पावंति न दुक्ख-दोगच्चं ॥ पावंति न दुक्ख-दोगच्चं ॥ उवसग्गहरं पासं, पासं वंदामि कम्मघण-मुक्कं । [गाथा 4] तुह सम्मत्ते लद्धे चिंतामणि कप्प-पायव-ब्भहिए । पावंति अविग्घेणं जीवा अयरामरं ठाणं ॥ जीवा अयरामरं ठाणं ॥ उवसग्गहरं पासं, पासं वंदामि कम्मघण-मुक्कं । [गाथा 5] इह संथुओ महायस भत्ति-भर-निब्भरेण हिअएण । इह संथुओ महायस भत्ति-भर-निब्भरेण हिअएण । ता देव! दिज्ज बोहिं, भवे भवे पास जिणचंद ॥ ता देव! दिज्ज बोहिं, भवे भवे पास जिणचंद ॥ भवे भवे पास जिणचंद ॥ [समापन] उवसग्गहरं पासं, पासं वंदामि कम्मघण-मुक्कं । उवसग्गहरं पासं, पासं वंदामि कम्मघण-मुक्कं । Presented By Stutiam 🔔 ऐसे ही भक्ति-पूर्ण स्तोत्र और भजनों के लिए Stutiam को Subscribe करें। #उवसग्गहरं #UvasaggaharamStotra #Uvasaggaharam #JainStotra #Parshvanath #पार्श्वनाथ #JainMantra #Jainism #JainBhajan #Stotra27Times #Jaap #JainMeditation #BhadrabahuSwami #JainBhakti #Stutiam #jainism