पाली और संस्कृत में सबसे प्राचीन भाषा कौन सी है | संस्कृत का नाम संस्कृत कैसे पड़ा |
Jeevan aur Vigyan
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पाली और संस्कृत में सबसे प्राचीन भाषा कौन सी है | संस्कृत का नाम संस्कृत कैसे पड़ा |
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जैसे हिंदी का जन्म संस्कृत से वैसे ही संस्कृत का जन्म पाली भाषा से हुआ है
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आज हम बात करने वाले हैं की भारत में पाई जाने वाली दो प्राचीन भाषाओ में से सबसे प्राचीन भाषा कौन सी है, जैसा की हम सब जानते है की मानव सभ्यता का विकास बहुत ही धीरे धीरे हुआ है, मनुष्य पहले अन्य जीवो की तरह जंगलों में रहा करता था फिर जैसे जैसे मनुष्य का दिमाग विकसित होता गया वो अपनी ज़रूरत के अनुसार सुविधाएं जुटाता गया उसके बाद एक समूह में रहने की शुरुवात हुई और फिर कई हजार वर्षों में मनुष्य ने भाषा का अविष्कार किया फिर उस भाषा को लिखने की शैली विकसित की गई और इसी प्रकार दुनिया में जितनी भी भाषाएँ हैं सबका विकास हुआ,
आज तक भारत में जीतनी भी पुरातात्विक खुदाई हुई उसमे से ये पता चला है की आज से करीब पांच से १० हज़ार वर्ष पूर्व भाषा का अविष्कार हो चुका था और उसे लिखने की परंपरा भी विकसित हो चुकी थी, सिन्धु घाटी की सभ्यता के बारे में ये अनुमान लगाया गया है की ये सभ्यता आज से करीब ५ हज़ार वर्ष पहले की है यानि २५०० से ३००० इसा पूर्व की . लेकिन सिन्धु घाटी की सभ्यता में पाई गयी भाषा को पढ़ा नहीं जा सका है, उसके बाद आती है पाली भाषा जिसे प्राकृत भाषा भी कहा जाता है, पाली भाषा ही एक ऐसी सबसे प्राचीन भाषा है जिसे आज पढ़ा जा सकता है और जो चक्रवर्ती सम्राट अशोक द्वारा लिखाये गए शिला लेखों और स्तंभों पर लिखी हुई मिलती है इससे ये सिद्ध होता है की पाली भाषा का उद्भव आज से करीब ३००० वर्ष पहले हुआ होगा क्योकि तथागत भगवान् बुद्ध के सारे उपदेश पाली भाषा में ही संरक्षित हैं. पाली भाषा की जो लिपि है उसे धम्म लिपि कहा जाता है. पुरातात्विक खुदाई के दौरान आज तक जितने भी शिलालेख प्राप्त हुए हैं उन सभी पर लिखी बातें पाली भाषा में ही हैं, अब रही संस्कृत की बात तो संस्कृत के नाम में ही उसके उद्भव यानि उसकी उत्पत्ति का राज़ छुपा है, संस्कृत का अर्थ ही होता है की किसी भी चीज का संस्करण किया हुआ रूप! संस्कृत का नाम इसी वजह से संस्कृत रखा गया, जिस प्रकार अलंकारित की हुई चीज़ को अलंकृत कहा जाता है उसी प्रकार संस्कारित की हुई भाषा को संस्कृत कहा गया है, और संस्कृत भाषा पाली भाषा का संस्कारित रूप है जिसे धीरे धीरे विकसित किया गया और बहुत ही उन्नत बनाया गया, यदि इतिहास के अनुसार इसका परिक्षण किया जाय तो संस्कृत भाषा का उद्भव पांचवी शताब्दी के बाद हुआ होगा यानि गुप्त काल के दौरान. क्योकि गुप्त काल से पहले संस्कृत का कहीं भी नामोनिशान नहीं है, संस्कृत भाषा का उच्चारण पाली भाषा से काफी मिलता जुलता हैं इसलिए इसी से हम इस बात की पुष्टि कर सकते हैं की पाली का भाषा भारत की सबसे प्राचीन भाषा है और पाली का परिष्कृत रूप ही संस्कृत है. संस्कृत भाषा की लिपि नागरी लिपि है और इस नागरी लिपि का भी उद्भव यानि विकास आज से १२०० से १५०० पूर्व के आस पास हुआ है यानि संस्कृत भाषा के साथ ही नागरी लिपि का उद्भव हुआ है.
अतः हम कर सकते है की संस्कृत भाषा का जन्म पाली भाषा से काफी बाद में हुआ है इसलिए पाली भाषा ही सबसे प्राचीन भाषा है और धम्म लिपि सबसे प्राचीन लिपि जिसे आज पढ़ा जा सकता है. हमारा उद्देश्य किसी भाषा से किसी भाषा की तुलना करना नहीं था बल्कि भाषाओ के विकास पर चर्चा करना था, पाली भाषा भले ही प्राचीन भाषा है पर दुनिया की सबसे समृद्ध और परिष्कृत भाषा संस्कृत है जिससे हमारी राष्ट्र भाषा हिंदी का जन्म हुआ है.