मन की गठरी हल्की हुई | 4 november murli song | BK MURLI SONGS #BrahmaKumaris
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राहें वही थीं, काम वही थे — बस याद में बैठे तो बोझ उतर गया। 4 नवंबर 2026 की मुरली के भावों से प्रेरित यह कोमल गीत बाबा से बात करके मन की गठरी हल्की होने की मीठी बरसात है।
4 नवंबर की मुरली का सार — मीठे बच्चे, ज्ञानवान बनो तो धनवान बन जायेंगे; बाप को बच्चों पर तरस पड़ता है इसलिए श्रेष्ठ तकदीर बनाने के लिए सिर से पापों का बोझ उतारने की श्रीमत देते हैं। ड्रामा की ढाल सामने रख खुशी की खुराक खाओ।
वरदान: ड्रामा की ढाल को सामने रख खुशी की खुराक खाने वाले सदा शक्तिशाली भव।
स्लोगन: परचिंतन और प्रदर्शन की धूल से दूर रहने वाले ही सच्चे अमूल्य हीरे हैं।
0:00 शायरी — राहें तो वही थीं, वही काम थे सारे
0:21 मुखड़ा — मन की गठरी हल्की हुई
0:50 अंतरा १ — व्यर्थ हिसाबों में न खोऊँ
1:11 मुखड़ा — बाबा से जब बात हुई
1:35 संचारी — तुमसे जो जाना, जीवन में लाना
1:49 अंतरा २ — मन में कोई काँटे न बोऊँ
2:12 मुखड़ा — मीठी सी बरसात हुई
2:46 अंतरा २ — कर्म सँवारूँ, याद सँभालूँ
3:08 मुखड़ा — मन की गठरी हल्की हुई
3:32 अंतिम मुखड़ा — हल्की हुई
ॐ शान्ति।
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