क्या क्यूरेटिवे पिटिशन में सेवारत शिक्षकों को TET से राहत मिलेगी । क्या संभावना बनता है #tet
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क्या क्यूरेटिवे पिटिशन में सेवारत शिक्षकों को TET से राहत मिलेगी । क्या संभावना बनता है #tet
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क्या क्यूरेटिवे पिटिशन में सेवारत शिक्षकों को TET से राहत मिलेगी । क्या संभावना बनता है #tet #teachers #supremecourt #supremecourtdecision #reviewpetition #halafnama #affidavit #curativepetition #curative #sansad
क्यूरेटिव पिटिशन में शिक्षकों को राहत मिलेगी या नहीं इस संबंध में शत प्रतिशत कुछ कहना मुश्किल होगा । लेकिन इसकी संभावनाओं पर तर्कों के आधार पर विचार किया जा सकता है।
आम तौर पर सुप्रीम कोर्ट के यदि पिछले इतिहास को देखते हैं तो न्यायालय में क्यूरेटिव पिटिशन स्वीकार होने या निर्णय बदलने की दर 1% से भी कम होती है, क्यूरेटिव पिटीशन एक असाधारण कानूनी उपाय है जो केवल गंभीर न्यायिक त्रुटि या नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन की स्थिति में ही स्वीकार होता है।
शिक्षकों के पक्ष में कौन कौन से आधार है जो क्यूरेटिव पिटिशन स्वीकार होने के दावे को मजबूत बनाता है ।
TET मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट के समान बेंच का ही तीन निर्णय है जो आपस में अन्तर्विरोधी है जिसमें से दो निर्णय शिक्षकों के पक्ष में है और एक निर्णय विपक्ष में ऐसे में एक न्यायिक विसंगति उत्पन्न हो गया है जिसे दूर करना अनिवार्य है और जब तक इसकी सुनवाई बड़ी बेंच में नहीं होती है यह विसंगति दूर नहीं हो सकता है । इसके अलावा कई हाई कोर्ट्स द्वारा भी इस संबंध में कुछ अलग अलग निर्णय दिए जा चुके हैं । ऐसे में एक फुल ऑथोरिटी वाला स्पष्ट निर्णय आना बेहद जरूरी है जो सर्वमान्य हो और पूरी तरह से स्पष्ट हो । क्यूरेटिव पिटिशन स्वीकार होने का यह सबसे मजबूत और अकाट्य आधार है । यह अकेला ऐसा आधार है जो क्यूरेटिव पिटिशन स्वीकार करवाने की क्षमता रखता है ।
Doctrine of precedent का उल्लंघन।
एक सितंबर 2025 का निर्णय और रिव्यू निर्णय इस नियम का उल्लंघन करता है । न्यायिक प्रक्रिया यह कहता है कि समान बेंच द्वारा दिए गए पूर्व निर्णय का पालन समान बेंच को करना होता है । यदि वो इस निर्णय से असंतुष्ट है तो इसे बड़ी बेंच में रेफर कर सकता है लेकिन किसी भी हालत में इसे पलट नहीं सकता है उसके विपरीत निर्णय नहीं दे सकता है । जबकि 29 मई का रिव्यू निर्णय 2018 में दिए गए सामान बेंच के निर्णय के बिल्कुल विपरीत है। यदि ऐसा निर्णय गलती से पास हो जाता है तो वह निर्णय par incurium कहलाता है और वो बाध्यकारी नहीं होता है । यह न्यायिक डिसिप्लिन है जिसे अदालत को फॉलो करना होता है । इसे डॉक्ट्रिन ऑफ कोऑर्डिनेट बेंच भी कहते हैं ।
3. RTE एक्ट लागू होने (2010) से पहले सेवा में आए इन-सर्विस शिक्षकों पर यह नियम लागू करना उनके सेवा अधिकारों का हनन है।
Topics discussed in this video :-
क्यूरेटिवे पिटिशन पर सुनवाई कब तक होने की संभावना है,
क्या क्यूरेटिवे पिटिशन मे शिक्षकों को TET से राहत मिल सकती है,
क्यूरेटिवे पिटिशन में शिक्षकों को TET से राहत मिलने की कितनी संभावना है,
सजल देव केस मे निर्णय कब तक आने की उम्मीद है,
क्या सजल देव केस मे निर्णय पलट सकता है,
सुप्रीम कोर्ट मे TET केस मे क्युरटिव पिटिशन का क्या हुआ,
TET अनिवार्यता के विरोध मे शिक्षकों द्वारा दिल्ली मे विशाल धरना प्रदर्शन,
दिल्ली मे लाखों शिक्षकों ने TET का विरोध किया,
परेशानियों के बावजूद दिल्ली मे शिक्षकों का आंदोलन सफल रहा,
काफी संख्या में शिक्षक धरना प्रदर्शन में पहुंचे और और tet अनिवार्यता का जमकर विरोध किया,
दिल्ली पुलिस द्वारा अनेक शिक्षकों को धरना प्रदर्शन वाले स्थल पर जाने से रोका गया,
अन्य राज्य के शिक्षकों ने भी TET के विरोध मे विधान सभा मे प्रस्ताव पारित करने की मांग की,
सुप्रीम कोर्ट के TET के संबंध में दो निर्णय आपस में परस्पर विरोधी हैं,
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