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Utho Beta Ali Akbar as Phuphi Tumko Jagati He.....Arif Ravish karbalai

Arif Ravish Sankhnavi

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Utho Beta Ali Akbar as Phuphi Tumko Jagati He.....Arif Ravish karbalai

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Arif Ravish Sankhnavi
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Anjuman Haidry Regd.Sankhni Title: Phuphi Tumko Jagati Hai Reciter: Arif Ravish Karbalai Poet: Janab Mansoor Sankhnavi Sahab SUBSCRIBE: Arif Ravish ©Arif Ravish #arifravish #azadarisankhni #moharram #newnoha #2026 #like #subscribe #support नौहा ✍️:- हुई क्या बात ऐ बेटा रखे हैं हाथ क्यों दिल पर झुकाए सर को रोते हैं कमर पकड़े हुए सरवर परेशान है फूफी तेरी परेशान है तेरी मादर ख़फ़ा हो क्यों मेरे बेटा बताओ ऐ अली अकबर उठो बेटा अली अकबर फूफी तुमको जगाती है सदा सुनते नहीं क्योंकर फूफी तुमको जगाती है 1.शबीहे मुस्तफ़ा है तू मेरी आँखों का तारा है अठारह साल तक मैंने तुझे ये कहके पाला है मेरे मजलूम भाई की ज़ईफ़ी का सहारा है मुसीबत आ गई बेटा मेरा भाई अकेला है उठो बेटा अली अकबर... 2.मेरे नाना के सांचे में खुदा ने तुझको ढाला है मेरी जाँ तुझमें बसती है मुझे तू जाँ से प्यारा है मेरी आँखों की ठंडक तू मेरे घर का उजाला है लईं ने किस लिए नेज़ा तेरे सीने पे मारा है उठो बेटा अली अकबर... 3.तमन्ना थी अली अकबर तुझे दूल्हा बनाऊँगी गूंधा फूलों से मैं सेहरा तेरे सर पर सजाऊँगी हल्ब की शाहज़ादी को ब्याह कर घर में लाऊँगी ख़बर क्या थी तेरे लाशे पे मैं आँसू बहाऊँगी उठो बेटा अली अकबर... 4.मुसीबत की घड़ी है छोड़ के जाओ न यूँ दिलबर फूफी का दिल है परेशान है लरज़ता है दिल-ए-मुज़्तर लईं बढ़ बढ़ के आते हैं सदा सुनते नहीं क्योंकर मदद को मैं जगाती हूँ बचा लो नींद से उठकर उठो बेटा अली अकबर.. 5.अली अकबर तेरी फ़ुरक़त नहीं सह पाएगी लैला लहू आँखों से अपने क़ल्ब का बरसाएगी लैला पछाड़े खाएगी घबराएगी चिल्लाएगी लैला तुझे इस हाल में देखेगी तो मर जाएगी लैला उठो बेटा अली अकबर... 6.अज़ाँ का वक़्त होता है अज़ाँ दे दो मेरे दिलबर सुना दो नाना का लहजा उठो हमशक्ल-ए-पैग़म्बर बहुत बेचेन है बेटा तेरी मासूम सी ख़्वाहर उठो आग़ोश में ले लो सकीना को अली अकबर उठो बेटा अली अकबर फूफी तुमको... 7.लिखा सुग़रा ने ख़त में तशना-ए-दीदार हूँ भइया कदम दो चल नहीं सकती बहुत लाचार हूँ भइया कमर मिसले-कमाँ है लागर-ओ-ग़मख़्वार हूँ भइया चले आओ मुझे लेने बहुत बीमार हूँ भइया उठो बेटा अली अकबर... 8.मदीने में तेरी ख़्वाहर लहू के अश्क रोती है मेरा भइया नहीं आया ये कह कर जान खोती है अज़ाँ होती है जब बेटा क़यामत उस पे होती है सुकू से सो गए तुम तो मगर सुग़रा ना सोती है उठो बेटा अली अकबर... फूफी तुम... 9.लबों पर है दुआ 'मंसूर' के करबो बला जाऊँ अली अकबर के सदके में रविश में ये शरफ़ पाऊँ बला के दश्त से फिर लौट के ज़िंदा नहीं आऊँ शबीह-ए-मुस्तफ़ा के दर पे ही रो रो के मर जाऊँ उठो बेटा अली अकबर फूफी तुमको जगाती है