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हीरा हाथ में था… फिर भी काँच समझकर खो दिया! क्या हम भी अपना मानव जन्म ऐसे ही गँवा रहे हैं? 🙏💎

Satya Bodh Satsang

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हीरा हाथ में था… फिर भी काँच समझकर खो दिया! क्या हम भी अपना मानव जन्म ऐसे ही गँवा रहे हैं? 🙏💎

140 просмотров · 3 недели назад
Satya Bodh Satsang
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सद्गुरूवै नमः🙇🏻‍♀️ आप सभी को सतनाम साहिब जी🙏 सत्य बोध :- हे साहिब! आपको अनंत अनंत प्रणाम आपका अनंत अनंत शुक्रिया साहिब जी🙇‍♀️ मालिक आनंद का असिम स्त्रोत है वे हमारे लोक और परलोक दोनों को संवार देते है। यह सत्संग हमें हमारे दुर्लभ मानव जन्म की कीमत समझाता है। गुरु नानक देव जी की वाणी के माध्यम से बताया गया है कि मनुष्य माया, मोह, लोभ और अहंकार में उलझकर अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य को भूल जाता है। संसार के सुख में बहुत से लोग हमारे साथ होते हैं, लेकिन दुख और कठिन समय में अक्सर कोई साथ नहीं रहता। अंत समय में धन, संपत्ति, रिश्ते और सांसारिक सुख हमारे साथ नहीं जाते। उस समय प्रभु का नाम और भजन ही सच्चा सहारा बनते हैं। 🙏 यह वाणी हमें समझाती है कि जिस प्रकार पानी का बुलबुला क्षणभर में बनकर मिट जाता है, उसी प्रकार यह संसार और हमारा जीवन भी नश्वर है। हमें इस अनमोल मानव देह को केवल माया के पीछे भागकर व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। 💛 सच्चा सुख प्रभु के नाम में है। 🪷 सच्चा सहारा प्रभु का स्मरण है। 🙏 और मानव जन्म की सच्ची सार्थकता नाम भजन में है। आइए, इस सत्संग को ध्यानपूर्वक सुनें और अपने मन को प्रभु के नाम से जोड़ने का प्रयास करें। वाहेगुरु जी का नाम ही जीवन का सच्चा धन है। 🙏✨ #सत्संग #गुरुनानकदेवजी #गुरबाणी #नामभजन #प्रभुनाम #आध्यात्मिकज्ञान #भक्ति #सच्चासुख #मानवजन्म #मायामोह #वाहेगुरु #सत्संगवाणी