Tum Khush Ho To Shikayat Kaisi | Jagjit Singh
Jyoti 2.7*
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Tum Khush Ho To Shikayat Kaisi | Jagjit Singh
5 026 просмотров · 2 недели назад
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Tum Khush Ho To Shikayat Kaisi | Jagjit Singh
Lyrics:
[Intro, Sarangi alaap]
आज फिर दिल ने यही सोचा है दर्द अपना है तो शिकवा कैसा
[Verse 1]
तुम खुश हो तो शिकायत कैसी फिर मेरी आँख में ये नमी कैसी तुमने चुन ली है नई राह अगर मेरे हिस्से में ये बेबसी कैसी
[Hook]
तुम खुश हो तो शिकायत कैसी तुमसे फिर कोई शिकायत कैसी दिल ने चाहा था तुम्हें अपना समझ अब मोहब्बत में ये शर्तें कैसी
[Verse 2]
मैंने तस्वीर हटा दी लेकिन उसकी जगह दीवार पे खाली है तेरा होना तो नहीं है घर में तेरी कमी आज भी बाकी है
[Verse 3]
तेरे ख़त मैंने जला तो डाले राख को फेंक न पाया अब तक तेरा नाम होंठ से जाता ही नहीं दिल तुझे भूल न पाया अब तक
[Interlude, Flute and acoustic guitar]
[Hook]
तुम खुश हो तो शिकायत कैसी फिर ये रातों की बग़ावत कैसी मैंने माना कि तुम मेरे न रहे दिल को फिर तेरी ज़रूरत कैसी
[Verse 4]
कल किसी ने तेरा ज़िक्र किया मैंने हँसकर कहा पहचानता हूँ फिर अकेले में बहुत देर तलक मैंने माना कि तुझे चाहता हूँ
[Verse 5]
तुम किसी और के होकर भी अगर कभी तन्हा हो तो इतना करना मेरी यादों को बुलाना न सही एक पल मुझको महसूस करना
[Bridge, Emotional rise]
मैं तुम्हें लौट के आने को नहीं कहता हूँ मैं तुम्हें फिर से मनाने को नहीं कहता हूँ जिस जगह छोड़ गए थे मुझे बरसों पहले बस कभी उस जगह आकर मुझे याद करना
[Hook, Emotional crescendo]
तुम खुश हो तो शिकायत कैसी फिर मेरी आँख में ये नमी कैसी तेरी दुनिया में उजाला है अगर मेरी रातों से शिकायत कैसी
[Outro, Sparse harmonium]
तुम खुश हो तो शिकायत कैसी तुमसे अब कोई शिकायत भी नहीं एक तुम थे जो मेरे हो न सके अब किसी और की चाहत भी नहीं
[End]