भगवान की उत्पत्ति से पहले आदिवासी? भगवान से पहले कौन था? आदिवासी इतिहास पर बड़ा बयान | Satish Pendam
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भगवान की उत्पत्ति से पहले आदिवासी? भगवान से पहले कौन था? आदिवासी इतिहास पर बड़ा बयान | Satish Pendam
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क्या भगवान की उत्पत्ति से पहले इस भारत में आदिवासी मौजूद थे?
भगवान से पहले कौन था? क्या आदिवासी ही इस देश के असली मूल निवासी हैं?
इस वीडियो में आदिवासी समाज के प्रमुख विचारक और सामाजिक कार्यकर्ता सतीश पेंदाम ने इतिहास, धर्म, आस्था और व्यापार से जुड़े कई बड़े सवाल उठाए हैं।
यह भाषण सिर्फ एक विचार नहीं, बल्कि एक गहरी सच्चाई को सामने लाने की कोशिश है, जो सदियों से छुपी हुई है।
👉 इस वीडियो में जानिए:
आदिवासी इतिहास का असली सच
धर्म और आस्था पर बड़ा सवाल
भारत के मूल निवासियों की पहचान
क्या इतिहास हमें गलत बताया गया?
Live: 📍 Balaghat आदिवासी संरक्षक, बिरसा ब्रिगेड संस्थापक प्रमुख मार्गदर्शक आदरणीय सम्माननीय
आदरणीय इंजीनियर सतीश पेंद्राम दादा भव्य आदिवासी महासम्मेलन एवं मूर्ति अनावरण कार्यक्रम
ग्राम जैतपुरी (गढ़ी) की पावन धरा पर आदिवासी महासम्मेलन एवं क्रांति नायक भगवान टंट्या भील जी की मूर्ति अनावरण का कार्यक्रम
लोकतंत्र की बात नहीं सुनते वो बोल रहे हैं तुमको कि तुम गैर लोकतांत्रिक हो तुम राष्ट्र विरोधी हो बार-बार बोलता हूं
जहां पे तुम हजारों सालों से रह रहे हो जहां पे तुम्हारे पुरखों की लाशें दफन है वो जमीन पल में तुमसे छीन लेंगे 10 लाख में ये जमीन किसकी है?
इस देश का मालिक कौन है मोदी है अडानी है अंबानी है कोई और नेता है ?
अध्यक्ष बना देते उससे क्या उखाड़ लेगा तू जब तक तेरे भेजे में कुछ नहीं रहेगा तेरे विचारों में ताकत नहीं रहेगी क्या कर लेगा?
समाज ही नहीं समझाया उसको पार्टी समझती है जात समझता है भगवान समझ रहा है धर्म समझ रहा है? पर आदिवासी समाज नहीं ?
लेबर कमीशन की रिपोर्ट बोल रही है। जिसको श्रम विभाग बोलते हैं। पूरे मध्य प्रदेश में 80% आदिवासी महिलाएं मजदूर है।?
पूरे मध्य प्रदेश में यानी आदिवासियों के हर घर में मजदूर पैदा हो रहा है।
डॉक्टर पैदा नहीं हो रहा है।
इंजीनियर पैदा नहीं हो रहा है।
टीचर पैदा नहीं हो रहा है। आदिवासियों के घरों में मजदूर पैदा हो रहा है।
ये एकके दुक्के उदाहरण हो गए उंगलियों में गिनने लायक। जहां आपको दिख रहा है कि आपके घरों में कोई डॉक्टर बन गया। एक आध बच्चे को नौकरी लग गई। अरे अब तो रिजर्वेशन भी खत्म हो गया। जो बच्चे को बाप ने कर्जा करके इंजीनियर बनाया वो बच्चा बेरोजगार हो गया। उसने बैंक से लोन ले लिया। बैंक का लोन भी फेर रहा है और बच्चा छाते पर बैठा हुआ है। घर में बैठा हुआ है। क्यों? क्योंकि गवर्नमेंट ने कोई वैकेंसी नहीं निकाली। कोई नियुक्तियां नहीं हुई।
आदिवासी कॉलम
लाखों करोड़ों वर्ष से जीव जिस तरह पैदा होते थे, वैसे ही आज भी पैदा होते हैं, इस वास्तविक सत्य को ^आदिवासी परम सत्य^ मानते हैं और काल्पनिक सृष्टि सृजन सिद्धांत अस्वीकार करते हैं!!
लाखों करोड़ों वर्ष से जीव जो भोजन खाते थे, वही भोजन आज भी खाते हैं, इस वास्तविक सत्य को ^आदिवासी परम सत्य^ मानते हैं और प्रकृति विरुद्ध भोजन के प्रतिबंध अस्वीकार करते हैं!!
लाखों करोड़ों वर्ष से सभी जीवों को श्रेष्ठतम भोजन चौमासे (जुलाई, अगस्त, सितंबर, अक्टूबर) में मिलता हैं, इस समय पैदा हुए भोज्य पदार्थों को पहले ^प्रकृति-पूर्वज^ को भोग धराते हैं, फिर स्वयं खाते हैं, यह परंपरा आज भी जीवित देख सकते हैं, इस समय व्रत-उपवास अनुष्ठान यानी भूखे मरने के विचार को अस्वीकार करते हैं!!
आदिवासी तीन शक्तियों की उपासना करते आए हैं.. (1)प्रकृति (2)पूर्वज (3)अन्न .. इसलिए पूजा अर्चना के दौरान तीन बार हाथ जोड़कर माथा धरती पर अड़ा कर नमन करते हैं, यह रिवाज केवल आदिवासी समुदाय में जीवित हैं!!
लाखों करोड़ों वर्ष से आदिवासी समुदाय के पूर्वज सर्वशक्तिमान सम-विषम (महिला-पुरूष) दो शक्तियों से सृष्टि सृजन सिद्धांत को मानते हैं,इसलिए पूजा अर्चना विधान अकेले पुरूष नही कर सकता हैं, एकाद महिला की भी उपस्थिति अनिवार्यता को स्वीकार करते हैं, अन्यथा पूजा अर्चना पूरी नहीं हो सकती हैं, केवल पुरूष की उपस्थिति में पवित्र कर्म सिद्धांत को अस्वीकार करते हैं!!
लाखों करोड़ों वर्ष पुराने प्रकृति देव सूर्य, चन्द्रमा, तारे, पेड़ पौधे, जंगल, जीव जंतु, पहाड़, धरती, आसमान, खेत, खलिहान, नदी, जल, आंधी तूफान, बादल, बिजली की उपासना विधान आज भी संपन्न करते हैं, सफेद-लाल-हरे धर्म ध्वज में भी सूर्य-चन्द्रमा-तारे हैं, काल्पनिक देवी देवताओं की उपासना का न्यूनतम समर्थन करते हैं!!
लाखों करोड़ों वर्ष से सामूहिक नेतृत्व, सामुहिक सुरक्षा, सामुहिक पूजा पद्धति, सामुहिक संपत्ति, सामुहिक विवाह पद्धति, सामुहिक नृत्य को अपनी जीवन शैली का अंग मानते आए हैं, एक व्यक्ति-परिवार-समाज का वर्चस्व अस्वीकार करते आए हैं!!
"Official account of Birsa Brigade Fight For Right Org. founded in 1995" Chief Organizer-Satish gokuldas pendam BIRSA BRIGADE (International Mission, Self Respect Movement of Indigenous Peoples, All India Indigenous Students Federation, All India Indigenous Employees Federation, Adivasi Vichar Manch. save tribal movement Indus Nation i.e. Tribal India)
लड़ाई अस्मिता अस्तित्व स्वाभिमान जल जंगल जमीन की ना विधानसभा ना लोकसभा सबसे बड़ी ग्रामसभा मा. सर्वोत्तम न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक निर्णय में कहा कि आदिवासी भारत के मूलवासी और मूलमालिक है। वे ही इस देश के सबसे पहले नागरिक है, उन्हे मूलवासी होने का संवैधानिक सम्मान मिलना ही चाहिए भारत पूर्व प्राचीनकाल से कृषि राष्ट्र है, इसलिये यहाँ जल, जंगल, जमीन पूज्यनीय है वास्तव में यही जल, जंगल, जमीन की विचारधारा को दुनिया के अलग-अलग देश के वैज्ञानिकों में मानव केन्द्रित विचारधारा को ही सांस्कृतिक, सामाजिक राष्ट्रवाद और भारत को सिन्धु राष्ट्र कहा है।, सरकार देश की चालक हैं आदिवासी देश मालिक हैं
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