श्री शिव महापुराण कथा (अध्याय - 4) चंचुला का शिवलोक गमन एवं विन्ध्य पिशाच उद्धार याचना 🌿
Shiv Darshan Marg
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श्री शिव महापुराण कथा (अध्याय - 4) चंचुला का शिवलोक गमन एवं विन्ध्य पिशाच उद्धार याचना 🌿
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ॐ नमः शिवाय। हर हर महादेव। 🙏✨
'शिव दर्शन मार्ग — आत्मा से परमात्मा का मिलन' परिवार में आप सभी आत्मीय साधकों का हार्दिक स्वागत है। 🌿📿
सनातन धर्म के परम पावन ग्रंथ 'श्री शिव महापुराण' (गीताप्रेस गोरखपुर संस्करण) की प्रामाणिक, विस्तृत एवं पंक्ति-दर-पंक्ति कथा यात्रा के चतुर्थ अध्याय (Episode 4) में आपका स्वागत है।
तृतीय अध्याय में हमने बाष्कल ग्राम के पापी ब्राह्मण बिन्दुग के विन्ध्य पर्वत पर भयानक पिशाच बनने और उसकी पत्नी चंचुला द्वारा गोकर्ण तीर्थ में यमदंड का वर्णन सुनकर तीव्र वैराग्य प्राप्त करने की कथा का श्रवण किया था।
इस चतुर्थ अध्याय (Episode 4) में पूज्य सूत जी विस्तारपूर्वक बताते हैं कि कैसे पश्चाताप की अग्नि में तपकर चंचुला ने गोकर्ण तीर्थ में नियमपूर्वक शिवपुराण का श्रवण किया, कैसे देहत्याग के बाद उसे दिव्य स्वर्णिम विमान से कैलास धाम ले जाया गया, और कैसे जगज्जननी माता पार्वती ने उसे अपनी परम प्रिय सखी का पद प्रदान किया। साथ ही, कैलास के समस्त दिव्य ऐश्वर्य के बीच भी एक पतिव्रता स्त्री के रूप में उसने विन्ध्य पर्वत पर भूख-प्यास से तड़प रहे अपने पिशाच पति बिन्दुग के उद्धार के लिए माता पार्वती से क्या करुण याचना की।
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📌 इस पावन अध्याय (Episode 4) में विस्तार से श्रवण करें:
✨ गोकर्ण तीर्थ में चंचुला की कठोर साधना: समुद्र स्नान, भस्म-धारण, रुद्राक्ष एवं मिताहार
✨ विप्रवर के मुख से नियमपूर्वक श्रीशिवमहापुराण का अखंड श्रवण
✨ अंतकाल में बिना किसी व्याधि व भय के समाधिस्थ भाव से चंचुला का शांत देहत्याग
✨ गंधर्वों के मंगल गान और शिवगणों के साथ दिव्य स्वर्णिम विमान का अवतरण
✨ चंचुला का देवांगना जैसा रूप धारण कर कैलास पर्वत गमन
✨ स्फटिक मणि भवन में माता पार्वती और देवाधिदेव महादेव के साक्षात दर्शन
✨ जगज्जननी माता पार्वती द्वारा वात्सल्य से चंचुला को अपनी परम प्रिय सखी बनाना
✨ कैलास में पतिव्रत धर्म: पिशाच पति बिन्दुग का स्मरण और माता पार्वती से उद्धार की करुण याचना
✨ माता पार्वती द्वारा विन्ध्य पर्वत पर पिशाच योनि की पुष्टि और उद्धार का दिव्य आश्वासन
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📖 ग्रंथ आधार:
श्री शिव महापुराण (गीताप्रेस गोरखपुर संस्करण)
माहात्म्य — चतुर्थ अध्याय (चंचुला का शिवलोक गमन, पार्वती-सखी पद एवं पति उद्धार याचना)
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💬 कमेंट बॉक्स में देवाधिदेव महादेव और जगज्जननी माता पार्वती के श्रीचरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करते हुए प्रेम से लिखें:
"ॐ नमः शिवाय। हर हर महादेव!" 🔱
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