मोस्टामानू मेला 2026 पिथौरागढ़ | Mostamanu Mela Pithoragarh 2026
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मोस्टामानू मेला 2026 पिथौरागढ़ | Mostamanu Mela Pithoragarh 2026
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मोस्टामानू मेला डोली यात्रा पिथौरागढ़ | Mostamanu Mela Pithoragarh 2026
Mostamanu Mela Pithoragarh 2026 | मोस्तामानू मेला डोली यात्रा
🙏 जय मोस्टा देवता! जय सोर घाटी! 🙏
नमस्कार दोस्तों! स्वागत है आपका देवभूमि उत्तराखंड के सबसे प्रसिद्ध और आस्था के प्रतीक मोस्तामानू मेले 2026 में।
इस वीडियो में हम आपको लेकर चलेंगे पिथौरागढ़ के ऐतिहासिक मोस्तामानू मंदिर की पावन डोली यात्रा के दर्शन कराने।
मोस्तामानू मेला 2026 की तारीख - कब से कब तक?*
इस वर्ष 2026 में ऐतिहासिक छह दिवसीय मोस्तामानू महोत्सव 14 सितंबर से 19 सितंबर 2026 तक आयोजित हो रहा है।
प्रथम दिवस - 14 सितंबर 2026 : भव्य कलश यात्रा, ढोल-दमाऊ और छलिया नृत्य के साथ मेले का शुभारंभ।
मुख्य मेला - 15 सितंबर 2026 (मंगलवार) : इस दिन छह पट्टी सोर के आराध्य देव मोस्टा देवता और माँ महाकाली का पवित्र डोला उठेगा। यही इस मेले का सबसे बड़ा आकर्षण है।
स्थान - मोस्तामानू मंदिर, चंडाक पहाड़ी, पिथौरागढ़ से 7 किमी दूर, समुद्र तल से 6000 फीट की ऊँचाई पर।
🕉️ मेले का महत्व और इतिहास क्या है?
1. वर्षा के देवता: सोर घाटी के लोग मोस्टा देवता को वर्षा के देवता अर्थात वरुण देव के रूप में पूजते हैं। यह सोर घाटी के सबसे शक्तिशाली लोक देवता माने जाते हैं। किसान अच्छी फसल और सुख-समृद्धि के लिए इनका आशीर्वाद लेते हैं।
2. अकाल की कथा: मान्यता है कि सदियों पहले इस क्षेत्र में भयंकर अकाल पड़ा था। तब स्थानीय लोगों ने मोस्टा देवता की कठोर तपस्या और पूजा की, जिसके बाद क्षेत्र में मूसलाधार वर्षा हुई और लोगों को अकाल से मुक्ति मिली। तभी से हर साल भाद्रपद माह की ऋषि पंचमी के अवसर पर इस मेले का आयोजन किया जाता है।
3. पशुपतिनाथ का प्रतिरूप: कहा जाता है कि नेपाल से आए संत मोस्ता मानव ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। इसलिए यह मंदिर नेपाल के प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर का प्रतिरूप माना जाता है।
4. डोली का महत्व: मेले का मुख्य आकर्षण मोस्टा देवता की डोली है। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से इस पवित्र डोले को कंधा देता है, उस पर मोस्टा देवता की कृपा सदैव बनी रहती है और उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
यह मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी कुमाऊँनी संस्कृति, एकता और भाईचारे का प्रतीक है। यहाँ लोक कलाकारों, स्कूली बच्चों और महिलाओं द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते हैं।
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