आज की मुरली से कहानी | 18 सितम्बर 2026 | लूनपानी
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आज की मुरली से कहानी | 18 सितम्बर 2026 | लूनपानी
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कहानी सुनते-सुनते मुरली सहज याद हो जायेगी।
18 सितम्बर 2026 की साकार मुरली पर आधारित कहानी — "लूनपानी"।
एक अनाज आढ़त के दो सगे भाई। पचास बोरी गेहूँ दान करने वाला बड़ा भाई कैलाश सिर्फ़ इसलिए रूठ गया कि मंच पर उसका नाम नहीं बोला गया — सेंटर छोड़ा, मुरली छोड़ी, भाई से बात बंद। पंद्रह दिन के इस लूनपानी की क़ीमत पाँच लाख का चेक और चालीस साल की साख माँगने आई, और छोटे भाई माधव ने जवाब बहस से नहीं, कर्म से दिया।
मुरली की मुख्य बातें जो इस कहानी में समाई हैं:
• जब सर्विस में जाते हो तो कभी छोटी मोटी बात में एक दूसरे से रूठो मत अर्थात् नाराज़ न हो। अगर आपस में लूनपानी होते, बात नहीं करते तो डिससर्विस के निमित्त बन जाते। कई बच्चे तो बाप से भी रूठ जाते हैं। फिर ऐसे बच्चों की एडाप्शन ही रद्द हो जाती है।
• तुम आपस में लून-पानी हो गये हो। शिवबाबा को भूल जाते हैं इसलिए समझाया जाता है कि हमेशा शिवबाबा को याद करो। देह-अभिमान में आने से देहधारियों से रूठ पड़ते हैं।
• आज दिन तक जो भी पास्ट हुआ वह ड्रामा अनुसार ही कहेंगे। इसमें हम किसको बुरा भला नहीं कह सकते। जो कुछ होता है, ड्रामा में नूँध है। बाप आगे के लिए समझाते हैं कि सर्विस में ऐसे-ऐसे कर्म नहीं करो।
• धारणा: कभी भी आपस में बिगड़कर लूनपानी नहीं होना है। बहुत प्यार से बाप को याद करना है और मुरली सुननी है। तवाई नहीं बनना है।
• वरदान: एक बाप से योग रख सर्व का सहयोग प्राप्त करने वाले सच्चे योगी व सहयोगी भव।
• स्लोगन: पुराने संस्कारों को मेरा कहना अर्थात् पुरुषार्थ को ढीला करना।
अध्याय:
00:00 श्रीराम एंड ब्रदर्स — पंद्रह दिन का सन्नाटा
02:00 अन्नक्षेत्र — वो एक नाम
02:41 उस रात — सफ़ेद डायरी अंधेरे कोने में
03:23 बाबा कहते हैं — रूठो मत
04:36 सुबह की चाय और सूखा कपड़ा
05:56 ठाकुर विक्रम सिंह — माल में खोट
08:00 पाँच लाख का चेक रुका
09:22 गोदाम — छत की दरार
10:19 मिल का दफ़्तर — कमी की पुड़िया
11:30 शाम साढ़े पाँच — चेक वापस
12:58 डायरी का पन्ना
14:00 तू भी पानी पी ले माधव
ओम् शान्ति।
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