"प्रेमी पावै पीव को | Naam Ki Chunariya Odh Kar | Radhasoami Bhajan by Sarladas"
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"प्रेमी पावै पीव को | Naam Ki Chunariya Odh Kar | Radhasoami Bhajan by Sarladas"
प्रेमी पावै पीव को
नुगरा का किसा श्रृंगार
जिनै ओढ़ चुनर लेई नाम की
ओर ध्यान भजन के काम की
सुमिरन की जुड़ज्या तार।
जिनै लगन हिये में धार ली
और सूरत अपनी संवार ली
कर पावै वही दीदार।
मन मगन होवै गुंजार में
अनहद धुन की झंकार में
बन्दगी की चढ़े खुमार
मेरे सतगुरु कंवर बता रहे
मेरे ह्रदय बैठ के गा रहे
सरला के वो तारणहार।
"प्रेमी पावै पीव को" — सरलादास की रचना, एक आत्मा की पुकार है।
नाम की चुनरिया ओढ़, श्रृंगार छोड़, वो बस अपने सतगुरु का दीदार चाहती है।
यह भजन आत्मिक प्रेम, विरह और सुमिरन की झंकार है।
Singer/Lyrics: Sarladas
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Radhaswami g 🙏🙂❤️