राधारानी की विरह दशा का वर्णन | कविरत्न गोविन्द चतुर्वेदी जी | Radha Rani Virah Kavitta | Namamritam
नामामृतम्
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राधारानी की विरह दशा का वर्णन | कविरत्न गोविन्द चतुर्वेदी जी | Radha Rani Virah Kavitta | Namamritam
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राधारानी की विरह दशा का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन — कविरत्न श्री गोविन्द चतुर्वेदी जी की अनुपम काव्य-रचना।
इस कवित्त में श्रीराधारानी के हृदय में श्रीकृष्ण के विरह से उत्पन्न व्याकुलता का सुंदर चित्रण किया गया है। कभी श्रीकृष्ण के दर्शन की उत्कट अभिलाषा, कभी उनकी स्मृति, कभी अश्रुपूर्ण नेत्र और कभी वसन्त की सुगंधित हवा भी विरह को और तीव्र कर देती है।
फूलों की कोमल सेज भी राधारानी को सुख नहीं देती, क्योंकि उनके हृदय को केवल अपने प्रियतम श्री बनवारी के दर्शन की अभिलाषा है। कवि ने विरह, मान, प्रेम, स्मरण और मिलन की उत्कंठा को ब्रजभाषा के अत्यंत सुंदर शब्दों में व्यक्त किया है।
रचना: कविरत्न श्री गोविन्द चतुर्वेदी जी
प्रस्तुति: Ankur Chaturvedi
Channel: Namamritam
यह प्रस्तुति मूल काव्य के भाव को सरल हिन्दी अर्थ और भावानुकूल दृश्यों के माध्यम से समझाने का प्रयास है।
राधे राधे।
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