दबे पैरों से उजाला आ रहा हैं..Dabe pairon se ujala aa raha hai.. by Shashibhushan Samad | Nazm |
Shashi Samad
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दबे पैरों से उजाला आ रहा हैं..Dabe pairon se ujala aa raha hai.. by Shashibhushan Samad | Nazm |
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#Shashibhushan_Samad
यश मालवीय जी की इस नज़्म में, सत्ता की विफलताओं को छुपाए जाने वाले तरीक़ों को इशारों में उजागर किया गया है।
ये एक आशावादी गीत है। इसे पढ़ने व सुनने बाले ये अनुभव कर सकते हैं, की कोई प्रकाश पुंज अंधेरों को काटता हुआ उसकी सत्ता को नष्ट कर रहा है।
इस गीत का असर ये है, की सता के विरोध में खड़े होने वाले हाथ, इसपर तालियाँ बजा कर झूम उठते हैं।
इस दौर में इस गीत को राजनीतिक असहिष्णुता के बीच काव्यात्मक संवेदना का गीत अवश्य माना जा सकता है..
Nazm - Yash Malviya
Presented by - Shashibhushan Samad
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