श्री हित चौरासी पद 10 | आजु नागरी-किशोर | राधा कृष्ण रास लीला | Braj Bhakti
Shri Radha Kripa
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श्री हित चौरासी पद 10 | आजु नागरी-किशोर | राधा कृष्ण रास लीला | Braj Bhakti
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🙏 श्री राधे 🙏
श्री हित चौरासी — पद 10
“आजु नागरी-किशोर, भाँवती विचित्र जोर,
कहा कहौं अंग-अंग परम माधुरी।”
यह पद श्री राधा-कृष्ण की दिव्य माधुर्य-लीला, रास-विहार और वृंदावन की अनुपम भक्ति का सुंदर भाव प्रस्तुत करता है।
बाँसुरी की मधुर धुन, मृदंग की ताल, नूपुरों की झंकार और रास-मंडली की दिव्य छवि के माध्यम से इस पद को एक भावपूर्ण दृश्यात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है।
🌸 पद की पंक्तियाँ:
आजु नागरी-किशोर, भाँवती विचित्र जोर,
कहा कहौं अंग-अंग परम माधुरी ।
करत केलि कंठ मेलि, बाहुदंड, गंड – गंड,
परस, सरस रास लास मंडली जुरी ।।
श्या- सुन्दरी बिहार, बाँसुरी मृदंग तार,
मधुर घोष नूपुरादि किंकिनी चुरी ।
(जै श्री) देखत हरिवंश आलि, निर्तनी सुघंग चाल,
वारी फेरी देत प्राण देह सौं दुरी ।।
🌺 श्री हित हरिवंश महाप्रभु की वाणी से ब्रज रस और श्री राधा-कृष्ण की दिव्य भक्ति का अनुभव करें।
🙏 राधे राधे 🙏
Available on :
@BhajanMarg @ShriHitRadhaKripa @BhaktiMarg-k8j
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