सखियो वृंदावन आपण खोलिए, इहांज होसे आधार । जीवतणो जीवन छे, ते ता नहीं रे मूके निरधार । । १० ।।
कुलजम स्वरूप वाणी चौपाइयां
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सखियो वृंदावन आपण खोलिए, इहांज होसे आधार । जीवतणो जीवन छे, ते ता नहीं रे मूके निरधार । । १० ।।
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कुलजम स्वरूप वाणी चौपाइयां
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हे सखियों ! हम उन्हें वृन्दावन में खोजें, अवश्य ही हमारे प्रियतम यहीं पर होंगे। वे ही हमारे जीव के जीवन (अस्तित्व) के आधार हैं। वे निश्चित रूप से हमें नहीं छोड़ेगें ।
#parnami #pranami