ज्योतिषीय चर्चा और कहानियां ,पौराणिक कहानियां ,अध्यातिमक कहानियां
Namita Sanatan Gyan
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नमिता सुयाल ज्योतिषीय चैनल
मैं नमिता सुयाल नैनिताल, उत्तराखण्ड से आपके सामने हिंदी और कुमाऊंनी लोककथा ज्योतिषीय चर्चा लेकर आती हूँ। जो बचपन में हमें हमारी दादी-नानी सुनाया करती थी। मेरा इन कहानियों के माध्यम से अभी सभी को अपनी लोक संस्कृति व सभ्यता के बारे में जानकारी देना का एक प्रयास है।
दृढ़ प्रारब्ध (अर्थात् कभी न बदलने वाला प्रारब्ध)
2. अदृढ़ प्रारब्ध (अर्थात् बदले जा सकने वाला प्रारब्ध)
3. दृढ़ादृढ़ प्रारब्ध (अर्थात् आधा बदले जाने वाला व आधा नहीं बदले जाने वाला प्रारब्ध)
इन्हीं सब में दृढ़ादृढ़ प्रारब्ध की प्रधानता है। जिसके अंतर्गत जो प्रारब्ध में लिखे गए हैं, उन कष्टों को ग्रहशांति प्रयोगों की सहायता से घटा सकते हैं। ज्योतिष शास्त्र के पितामह भगवान पाराशर ने जो उपाय कहे हैं, हमें सर्वथा उन्हीं को मानना चाहिए। पाराशरी उपाय लाल किताब या किसी अन्य विधा से अधिक शीघ्र प्रभावी होते हैं। जब किसी ग्रह की दशा प्रारंभ हो, तो उससे संबंधित उपाय अवश्य करने चाहिए। चाहे अच्छी ग्रहदशा हो या खराब, पाराशरी उपाय हमेशा करने चाहिए ताकि गोचर में दशानाथ/अंतर्दशानाथ की खराब स्थिति कहीं अशुभफलप्रद न हो जाए। पाराशरी उपायों का कुप्रभाव भी नहीं होता।
पाराशर ने जो कुछ भी दर्शन दिया, उसका सारांश यहां प्रस्तुत है। सूर्य की महादशा में महामृत्युंजय मंत्र व शिवजी की कर्मकांड, स्तोत्रपाठ, अथवा मंत्रजाप आदि रूपों में अराधना करना श्रेयस्कर है। वैदिक मंत्र शिव की पूजा ,आदि का करने से लाभ होता है ।
धन्यवाद
जय भारत-जय उत्तराखंड