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किसी को छोड़ना बहुत भारी लगता है? बाप्पा का विसर्जन यही सिखाता है

Mind Moksha

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किसी को छोड़ना बहुत भारी लगता है? बाप्पा का विसर्जन यही सिखाता है

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हर साल बाप्पा को प्यार से घर लाते हो, और फिर अपने ही हाथों से विदा कर आते हो। वो भारीपन सिर्फ़ विसर्जन का नहीं है, वो हर उस चीज़ का है जिसे हम कसकर पकड़े बैठे हैं। भगवद गीता, ईशावास्य उपनिषद और विसर्जन मंत्र से समझिए कि छोड़ना खोना नहीं, पूरा होना है। इस वीडियो में गीता के अध्याय दो के अट्ठाईसवें श्लोक से समझेंगे कि जो आता है वो जाता क्यों है। ईशावास्य उपनिषद के पहले मंत्र से देखेंगे कि डर वाली पकड़ को समर्पण में कैसे बदलें। भागवत पुराण में यशोदा और कृष्ण की विदाई से समझेंगे कि अनासक्ति का मतलब प्यार कम करना नहीं है। और विसर्जन मंत्र की आख़िरी पंक्ति, पुनरागमनाय च, बताती है कि हर विदाई में लौटने का भरोसा छिपा है। Timestamps 0:00 छोड़ना इतना भारी क्यों लगता है 0:51 अर्जुन का डर और गीता का जवाब 2:30 डर वाली पकड़ और समर्पण 4:06 प्यार, बिना जकड़े 5:09 फिर आना, विदाई में भरोसा 6:13 बस मुट्ठी थोड़ी ढीली करो 6:41 सार और आपसे एक सवाल हम यहाँ इसलिए हैं कि मुश्किल वक़्त में सनातन धर्म की असली, शास्त्रों से जुड़ी सीख आप तक पहुँचे, एक ऐसा सहारा जिसे पकड़कर इंसान फिर खड़ा हो सके। इस विसर्जन आप किस चीज़ पर से अपनी पकड़ ढीली करेंगे, कमेंट में ज़रूर लिखिए। और ये वीडियो उस अपने को भेजिए जो आजकल किसी चीज़ को बहुत कसकर पकड़े बैठा है। #भगवदगीता #गणेशविसर्जन #अनासक्ति #ईशावास्यउपनिषद #मनकीशांति