BHDG-175 मध्यकालीन भारतीय साहित्य एवं संस्कृति IMPORTANT QUESTION
Master ji Ignou
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BHDG-175 मध्यकालीन भारतीय साहित्य एवं संस्कृति IMPORTANT QUESTION
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यह पाठ्यक्रम मुख्य रूप से भारत के मध्यकाल (Medieval Period) के समृद्ध साहित्य, संस्कृति और भक्ति आंदोलन पर केंद्रित है। इसके अंतर्गत भारत के विभिन्न क्षेत्रों (उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम) में उपजे साहित्य और सामाजिक बदलावों का गहराई से अध्ययन किया जाता है।
इस पूरे पाठ्यक्रम को 6 प्रमुख खंडों (Blocks) में विभाजित किया गया है:
1. खंड-1: भक्ति का आविर्भाव – इसमें भक्ति आंदोलन की शुरुआत, इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और इसके दार्शनिक मतों के बारे में पढ़ाया जाता है।
2. खंड-2 और 3: दक्षिणांचल भक्ति साहित्य (भाग 1 और 2) – इसमें दक्षिण भारत के भक्ति साहित्य (जैसे आलवार, नयनार संत) और कन्नड़ भक्ति साहित्य (जैसे बसवेश्वर और उनके वचन) का अध्ययन शामिल है।
3. खंड-4: पश्चिमांचल भक्ति साहित्य – इसके अंतर्गत भारत के पश्चिमी राज्यों (जैसे गुजरात और महाराष्ट्र) के संतों (जैसे नामदेव) और उनके साहित्य का मूल्यांकन किया जाता है।
4. खंड-5: पूर्वांचल भक्ति साहित्य – इसमें पूर्वी भारत के मध्यकालीन साहित्य, असम के संतों (जैसे शंकरदेव, माधवदेव) और बांग्ला भक्ति साहित्य पर विद्यापति व जयदेव के प्रभाव को रेखांकित किया गया है।
5. खंड-6: उत्तरांचल भक्ति साहित्य – इस खंड में उत्तर भारत के प्रमुख संतों, विशेषकर कबीरदास जैसे ज्ञानाश्रयी कवियों और उनके सामाजिक-सांस्कृतिक योगदान का अध्ययन किया जाता है।
मुख्य उद्देश्य: इस विषय का उद्देश्य छात्रों को यह समझाना है कि कैसे मध्यकाल में विभिन्न भाषाओं के साहित्य और संतों ने भारतीय समाज में जाति-पांत के भेदभाव का विरोध करके सामाजिक समरसता, समानता और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा दिया।
आप इस कोर्स की आधिकारिक ई-पुस्तकें IGNOU eGyanKosh की वेबसाइट से मुफ्त में डाउनलोड कर सकते हैं।