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सत्यवती: कुरु वंश की मातृशक्ति | महाभारत की कथा | JN05

Subhala Tech

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सत्यवती: कुरु वंश की मातृशक्ति | महाभारत की कथा | JN05

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मत्स्यगंधा से हस्तिनापुर की महारानी और फिर कुरु वंश की राजमाता बनने तक सत्यवती का जीवन महाभारत की पूरी कथा को प्रभावित करता है। मछुआरे के परिवार में पली सत्यवती की भेंट महर्षि पराशर से होती है। उनके पुत्र कृष्ण द्वैपायन व्यास आगे चलकर महाभारत की कथा में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बाद में राजा शांतनु सत्यवती से विवाह करना चाहते हैं। सत्यवती के पिता दाशराज की शर्त के कारण देवव्रत सिंहासन का त्याग करते हैं और आजीवन ब्रह्मचर्य की भयंकर प्रतिज्ञा लेते हैं। तभी से वे भीष्म कहलाते हैं। शांतनु की मृत्यु के बाद सत्यवती कुरु वंश की राजमाता बनती है। चित्रांगद और विचित्रवीर्य की मृत्यु के बाद जब हस्तिनापुर का राजवंश उत्तराधिकारी के बिना रह जाता है, सत्यवती व्यास को स्मरण करती है। इसी निर्णय से धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर का जन्म होता है और कुरु वंश आगे बढ़ता है। लेकिन आने वाली पीढ़ियों में बढ़ते संघर्ष को देखकर व्यास सत्यवती को संसारिक जीवन से दूर होने की सलाह देते हैं। अंततः सत्यवती अंबिका और अंबालिका के साथ हस्तिनापुर छोड़कर वन की ओर चली जाती है। यह फिल्म सत्यवती के संपूर्ण जीवन की कथा प्रस्तुत करती है— मत्स्यगंधा से योजनेगंधा, हस्तिनापुर की रानी से राजमाता, और अंततः कुरु वंश की महान मातृशक्ति तक। महाभारत की कथाएँ — JN05 निर्माता: M V Krishna Rao इस श्रृंखला के अन्य भाग भी देखें: JN03 — आस्तीक JN04 — शांतनु JN05 — सत्यवती महाभारत के प्रमुख पात्रों और घटनाओं की ऐसी ही विस्तृत कथाओं के लिए चैनल को Subscribe करें। #महाभारत #सत्यवती #भीष्म #व्यास #हस्तिनापुर #Mahabharata #Satyavati