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सुंदरकांड दोहा 47-49 | शरण में आते ही मिला अभयदान! विभीषण शरणागति कथा

Kapil Singh Yadav

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सुंदरकांड दोहा 47-49 | शरण में आते ही मिला अभयदान! विभीषण शरणागति कथा

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Kapil Singh Yadav
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यहाँ सुंदरकांड के दोहा 47 से 49 (विभीषण शरणागति) के लिए 1000 अक्षरों के भीतर एक संपूर्ण और प्रभावी यूट्यूब वीडियो डिस्क्रिप्शन दिया गया है: सुंदरकांड दोहा 47-49 | शरण में आते ही मिला अभयदान! विभीषण शरणागति कथा जय श्री राम! 🙏 इस वीडियो में श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड (दोहा 47 से 49) के उस परम पावन प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन है, जब लंकापति रावण द्वारा अपमानित होकर विभीषण जी प्रभु श्रीराम के श्रीचरणों में शरण लेने पहुँचते हैं। सुग्रीव जी के मन में संदेह था कि कहीं यह शत्रु का कोई गुप्तचर न हो, परंतु शरणागत-वत्सल प्रभु श्रीराम ने स्पष्ट कहा— "सरनागत कहुँ जे तजहिं निज अनहित अनुमानि। ते नर पावँर पापमय तिन्हहि बिलोकत हानि॥" भगवान श्रीराम ने न केवल विभीषण को हृदय से लगाकर अभयदान दिया, बल्कि अपने भक्तों के सारे संकोच और भय को भी दूर कर दिया। यह प्रसंग ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास, सच्चे समर्पण और प्रभु की असीम करुणा की अद्भुत सीख देता है। वीडियो को पूरा देखें, लाइक करें और प्रभु भक्तों के साथ शेयर ज़रूर करें। सनातन धर्म और भक्ति प्रसंगों से जुड़े रहने के लिए चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें! 🚩 #Sundarkand #ShriRam #VibhishanSharnagati #Ramcharitmanas #JaiShreeRam #HanumanJi