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डाकू अंगुलिमाल डाकू अंगुलिमाल और महात्मा बुद्ध | Mahatma Buddha and Angulimal ★ सम्राट मनोज ब्लास्टर

Vikas Studio

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डाकू अंगुलिमाल डाकू अंगुलिमाल और महात्मा बुद्ध | Mahatma Buddha and Angulimal ★ सम्राट मनोज ब्लास्टर

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#डाकू_अंगुलिमाल_डाकू_अंगुलिमाल_और_महात्मा_बुद्ध _Mahatma_Buddha_and_Angulimal_★_सम्राट_मनोज_ब्लास्टर Title - इन डाकू अंगुलिमाल | डाकू अंगुलिमाल और महात्मा बुद्ध | Mahatma Buddha and Angulimal Singer - शाक्यों की शान सम्राट मनोज ब्लास्टर जी Producer & Director :- सम्राट विकाश शाक्य Audio _Videos Recording :- प्रमोद शाक्य Editing by :- विकाश शाक्य Label & Copyright © :- Vikash Studio Contacts Mail Us :- Vkshakya234@gmail.com Vikash Shakya :- 9520225580 All Rights Reserved :- VIkash Studio Sultanpur,Patara,Mainpuri Pin 205001 Uttar Pradesh हर रोज़ नयी-नयी वीडियो का आनंद लेने के लिए कृपया विकाश स्टूडियो चैनल को सब्सक्राइब करें ... Click To Subscribe- / @vikashstudio बुद्ध और अंगुलिमाल की कहानी Mahatma Buddha And Angulimal Story In Hindi एक समय की बात है, महात्मा बुद्ध मगध देश में पहुँचते हैं। उस समय मगध देश के एक क्षेत्र में एक डाकू का बहुत ही ज्यादा आतंक छाया हुआ था। जैसे ही अँधेरा होता था लोग घरो से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे। इसका कारण वह डाकू अंगुलिमाल था। अंगुलिमाल बहुत ही ज्यादा एक खूंखार डाकू था, जो जंगल में रहता था और अगर कोई भी राहगीर उस जंगल से गुजरता था तो वह रास्ते में लूट लेता था और उसे मारकर उसकी एक ऊँगली काटकर माला के रूप में अपने गले में बांध लेता था। इसी कारण से लोग उसे अंगुलिमाल कहते थे। उसी जंगल के पास में एक गाँव था। उस गाँव में जब महात्मा बुद्ध आए तो लोगों ने उनका बहुत स्वागत किया। लेकिन कुछ समय बाद महात्मा बुद्ध को पता चला कि यहाँ के लोगों के मन में काफी डर समाया हुआ है। तब महात्मा बुद्ध ने इसका कारण जानना चाहा। तब लोगों ने जो भी अंगुलिमाल की कहानी थी वह महात्मा बुद्ध को बता दिया कि अंगुलिमाल एक बहुत ही खतरनाक डाकू है। वह किसी भी निरपराध राहगीरों की हत्या कर देता है। उसे लूट लेते हैं और उसके एक ऊँगली को काटकर माला बनाकर पहन लेते हैं। इतने कुरुर शब्द सुनने के बाद महात्मा बुद्ध ने मन में निश्चय किया कि मैं इस डाकू से जरूर मिलूंगा और उसके थोड़े दिन बाद महात्मा बुद्ध जंगल में जाने के लिए तैयार हो गए। गाँव वालो ने महात्मा बुद्ध को बहुत रोका लेकिन वह नहीं माने। गाँव वाले समझ चुके थे कि आज महात्मा बुद्ध वापस लौटकर नहीं आने वाले। लेकिन बुद्ध बहुत ही अत्यंत शांत भाव से जंगल में चले जा रहे थे। जब महात्मा बुद्ध थोड़ा जंगल की ओर आगे बढ़े तभी महात्मा बुद्ध को पीछे से एक कर्कश आवाज कानो में पड़ी, “ठेर जा कहाँ जा रहा है?” लेकिन महात्मा बुद्ध इस बात को अनसुना करते हुए आगे बढ़ते रहे। इस तरह अंगुलिमाल बहुत गुस्सा हो गया और महात्मा बुद्ध को चेतावनी दिया कि रुक जा बरना मैं तुझे मार दूंगा। उसकी बात सुनकर बुद्ध रुक गए और महात्मा बुद्ध ने जब पीछे मुड़कर देखा तो सामने अंगुलिमाल डाकू खड़ा था और हाथ में तलवार लिए हुए था। अंगुलिमाल के गले में उंगलियों की माला लटक रही थी जैसा की गाँव वालो ने उन्हें बताया था और बहुत ही भयावह लग रहा था। इसके बाद महात्मा बुद्ध ने शांत स्वर में कहा, “मैं तो ठहर गया भला तू कब ठहरेगा?” यह सुनते ही अंगुलिमाल आश्चर्य में पड़ गया। अभी तक अंगुलिमाल से इस तरह किसी ने बात नहीं किया था और अंगुलिमाल को महात्मा बुद्ध के चेहरे में बिलकुल भी भय नहीं दिखाई दे रहा था। अभी तक जितने भी लोगों ने अंगुलिमाल को रोका था वह डरकर थर थर काँपने लगते थे। ऐसा देखकर अंगुलिमाल महात्मा बुद्ध से बोलता है, “सन्यासी क्या तुम्हे डर नहीं लग रहा? देखो मैंने कितने लोगों कोमारकर उनकी उँगलियाँ माला बनाकर पहन रखी है।”इस पर महात्मा बुद्ध बोले, “तुझसे क्या डरना? डरना है तो उससे डरो जो सचमुच ताकतपर हो।” अंगुलिमाल जोर-जोर हंसने लगा और बोला, “क्या तु मुझे ताकतपर नहीं समझता है? मैंन तो एक बार में दस-दस लोगों का सिर काट सकता हूँ।” यह सुनकर महात्मा बुद्ध ने अंगुलिमाल से कहा, “अगर तुम सचमुच ताकतपर हो तो जाओ उस पेड़ के दस पत्ते तोड़कर लाओ।” अंगुलिमाल ने तुरंत दस पत्ते तोड़े और बोला, “इसमें क्या है कहो तो मैं पेड़ ही उखाड़कर ले आऊँ। महात्मा बुद्ध ने कहा, “नहीं पेड़ उखाड़ने की जरुरत नहीं हैं। यदि तुम वास्तव में ताकतपर हो तो जाओ अब इन पत्तियों को पेड़ में जोड़ दो।’ अंगुलिमाल क्रोधित हो गया और वोला, “भला कभी टूटे पत्ते भी जुड़ सकते हैं?” यह बात सुनते ही महात्मा बुद्ध बोले, “तुम जिस चीज को जोड़ नहीं सकते उसे तोड़ने का अधिकार तुम्हे किसने दिया? एक आदमी का सिर जोड़ नहीं सकते तो काटने में क्या बहादुरी है?” अंगुलिमाल यह बातें सुनकर अचंभित रह गया और महात्मा बुद्ध के बातों को सुनने लगा। एक अनजान सी शक्ति अंगुलिमाल के ह्रदय को पूरी तरह से बदलकर रख दिया और अंगुलिमाल को महात्मा बुद्ध की बातें सुनकर काफी आत्मग्लानि महसूस हुआ। वह महात्मा बुद्ध के पैरो पर गिर पड़ा और बोला, “मुझे क्षमा कर दीजिए मैं भटक गया था। आप मुझे शरण में ले लीजिए।”⁷ भगवान बुद्ध ने उसे अपने शरण में ले लिया और अपना शिष्य बना लिया। तो यह थी महात्मा बुद्ध और अंगुलिमाल की कहानी। उम्मीद करते हैं आपको यह लेख “महात्मा बुद्ध और अंगुलिमाल की कहानी | Mahatma Buddha and Angulimal Story in Hindi” जरूर अच्छा लगा होगा।