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शुक्रवार प्रात: काल | लक्ष्मी चालीसा | Laxmi Chalisa सुनने मात्र से कर्ज बीमारी खत्म धन वर्षा शुरू

Ganga Bhakti Mantra

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शुक्रवार प्रात: काल | लक्ष्मी चालीसा | Laxmi Chalisa सुनने मात्र से कर्ज बीमारी खत्म धन वर्षा शुरू

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Ganga Bhakti Mantra
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शुक्रवार प्रात: काल | लक्ष्मी चालीसा | Laxmi Chalisa सुनने मात्र से कर्ज बीमारी खत्म धन वर्षा शुरू ✱Song Name:- Laxmi Chalisa + Laxmi Aarti ✱Singer:- Shikha Rana ✱Lyrics:- Traditional ✱Music:- Aashish Baagri ✱Copyright:- Ganga Bhakti Mantra ❤ भक्ति पूर्ण गानों के लिए क्लिक करें:-    • शुक्रवार प्रात: काल | दुर्गा चालीसा | Durg...   आप सभी भक्तों से अनुरोध है कि आप GANGA BHAKTI MANTRA के इस YOUTUBE चैनल को SUBSCRIBE करें और भजनो का आनंद ले अन्य भक्तों के साथ हमारी वीडियो को Share ज़रूर करें।। You will find here best of the best Devotional music ✱ If You like the video don't forget to share with others & also share your views. LIKE || COMMENT || SHARE AND SUBSCRIBE -------------------------------------------------------------------- Welcome To GANGA BHAKTI MANTRA YouTube Channel you can watch here All Videos Related To Devotional Bhajans ►►►►►►►►►►►►►► श्री दुर्गा चालीसा Durga Chalisa सुनने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. laxmi chalisa,shri laxmi chalisa,Om Jai Laxmi Mata, laxmi kavach,Laxmi Chalisa,Laxmi Chalisa path,Laxmi Chalisa with lyrics,Laxmi Chalisa in Hindi,Laxmi Chalisa benefits,Laxmi Chalisa Navratri,Maa Laxmi Chalisa,Maa Laxmi Chalisa full,Maa Laxmi Chalisa Hindi,Laxmi Chalisa 108 times,Durga Chalisa aarti,Durga Chalisa stotra,Durga Chalisa best version,Laxmi Chalisa,Durga Chalisa full path,Laxmi chalisa 2026,bhakti songs,devotional songs,2026,new Laxmi Chalisa Lyrics:- ।। दोहा ।। मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास। मनोकामना सिद्घ करि, परुवहु मेरी आस॥ तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पुरवहु आस हमारी॥ जय जय जगत जननि जगदम्बा । सबकी तुम ही हो अवलम्बा॥ तुम ही हो सब घट घट वासी। विनती यही हमारी खासी॥ जगजननी जय सिन्धु कुमारी। दीनन की तुम हो हितकारी॥ विनवौं नित्य तुमहिं महारानी। कृपा करौ जग जननि भवानी॥ केहि विधि स्तुति करौं तिहारी। सुधि लीजै अपराध बिसारी॥ कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी। जगजननी विनती सुन मोरी॥ ज्ञान बुद्घि जय सुख की दाता। संकट हरो हमारी माता॥ क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो। चौदह रत्न सिन्धु में पायो॥ चौदह रत्न में तुम सुखरासी। सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥ जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा। रुप बदल तहं सेवा कीन्हा॥ स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा। लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥ तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं। सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥ अपनाया तोहि अन्तर्यामी। विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी॥ तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी। कहं लौ महिमा कहौं बखानी॥ मन क्रम वचन करै सेवकाई। मन इच्छित वांछित फल पाई॥ तजि छल कपट और चतुराई। पूजहिं विविध भांति मनलाई॥ और हाल मैं कहौं बुझाई। जो यह पाठ करै मन लाई॥ ताको कोई कष्ट नोई। मन इच्छित पावै फल सोई॥ त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि। त्रिविध ताप भव बंधन हारिणी॥ जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै। ध्यान लगाकर सुनै सुनावै॥ ताकौ कोई न रोग सतावै। पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै॥ पुत्रहीन अरु संपति हीना। अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना॥ विप्र बोलाय कै पाठ करावै। शंका दिल में कभी न लावै॥ पाठ करावै दिन चालीसा। ता पर कृपा करैं गौरीसा॥ सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै। कमी नहीं काहू की आवै॥ बारह मास करै जो पूजा। तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥ प्रतिदिन पाठ करै मन माही। उन सम कोइ जग में कहुं नाहीं॥ बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई। लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥ करि विश्वास करै व्रत नेमा। होय सिद्घ उपजै उर प्रेमा॥ जय जय जय लक्ष्मी भवानी। सब में व्यापित हो गुण खानी॥ तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं। तुम सम कोउ दयालु कहुं नाहिं॥ मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै। संकट काटि भक्ति मोहि दीजै॥ भूल चूक करि क्षमा हमारी। दर्शन दजै दशा निहारी॥ बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी। तुमहि अछत दुःख सहते भारी॥ नहिं मोहिं ज्ञान बुद्घि है तन में। सब जानत हो अपने मन में॥ रूप चतुर्भुज करके धारण। कष्ट मोर अब करहु निवारण॥ केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई। ज्ञान बुद्घि मोहि नहिं अधिकाई॥ ॥ दोहा॥ त्राहि त्राहि दुख हारिणी, हरो वेगि सब त्रास। जयति जयति जय लक्ष्मी, करो शत्रु को नाश॥ रामदास धरि ध्यान नित, विनय करत कर जोर। मातु लक्ष्मी दास पर, करहु दया की कोर॥