जीवन-दान न माँगेगा | कर्ण का गुरु परशुराम के चरणों में समर्पण | रश्मिरथी
Veer Ras Records
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जीवन-दान न माँगेगा | कर्ण का गुरु परशुराम के चरणों में समर्पण | रश्मिरथी
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जीवन-दान न माँगेगा…
गुरु परशुराम का शाप सुनकर भी कर्ण अपने लिए जीवन की याचना नहीं करता। वह केवल इतना चाहता है कि यदि दण्ड मिलना ही है, तो अपने गुरु के चरणों में मिले।
पर कर्ण की विनती सुनते-सुनते उस क्रोधित गुरु की आँखों से भी दो अश्रु गिर पड़ते हैं…
यहीं परशुराम पहली बार अपने शिष्य के भीतर छिपे उस कर्ण को पहचानते हैं — अर्जुन के महान प्रतिद्वन्द्वी को, दुर्योधन के अटल मित्र को, और उस अद्भुत विद्यार्थी को जिसने उनके प्रत्येक शब्द को सीपी में मोती की तरह सँजोया था।
“परशुराम का शिष्य कर्ण, पर, जीवन-दान न माँगेगा…”
रश्मिरथी के कर्ण–परशुराम प्रसंग की यह प्रस्तुति गुरु-भक्ति, अपराधबोध, समर्पण और उस गुरु के हृदय की कथा है जिसका क्रोध धीरे-धीरे अपने प्रिय शिष्य के लिए करुणा में बदलने लगता है।
🎵 शीर्षक: जीवन-दान न माँगेगा
📖 प्रेरणा: रश्मिरथी — रामधारी सिंह ‘दिनकर’
🎬 प्रस्तुति: Veer Ras Records
यह कर्ण–परशुराम कथा का अगला अध्याय है। पूरी श्रृंखला के लिए Veer Ras Records को Subscribe करें।
आपसे एक प्रश्न:
यदि आप परशुराम के स्थान पर होते — क्या कर्ण को क्षमा कर देते?
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