CIA को चकमा देकर भारत ने कैसे किया पोखरण-II? | ऑपरेशन शक्ति 1998 की पूरी कहानी
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CIA को चकमा देकर भारत ने कैसे किया पोखरण-II? | ऑपरेशन शक्ति 1998 की पूरी कहानी
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11 मई 1998, दोपहर 3:45. राजस्थान के रेगिस्तान में ज़मीन काँपी और दुनिया सोचती रह गई कि ये हुआ कैसे.
दुनिया के सबसे ताक़तवर जासूसी उपग्रह ऊपर थे. फिर भी भारत के वैज्ञानिकों और सेना ने रेत के नीचे वो तैयारी पूरी कर ली, जिसने देश का इतिहास बदल दिया.
इस डॉक्यूमेंट्री में देखिए पोखरण-II, यानी ऑपरेशन शक्ति की पूरी कहानी: 1974 से 1998 तक का इंतज़ार, रातों का काम, कोड नाम, 3:45 का पल, और उसके बाद दुनिया की प्रतिक्रिया.
⏱️ अध्याय
0:00 शुरुआत: 11 मई 1998, पोखरण
1:33 अध्याय 1: 24 साल का इंतज़ार
3:35 अध्याय 2: जब पकड़े गए
4:36 अध्याय 3: 30 दिन
6:12 अध्याय 4: रेगिस्तान में अदृश्य
9:15 अध्याय 5: 11 मई
12:28 अध्याय 6: दुनिया का झटका
14:29 अध्याय 7: इसका मतलब क्या था
15:15 आपके लिए सवाल + अगली कहानी
❓ आपके लिए सवाल: पोखरण-II में कुल कितने परीक्षण हुए थे? जवाब कमेंट में लिखें 👇
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स्रोत: भारत सरकार द्वारा जारी तस्वीरें (nuclearweaponarchive.org के ज़रिए), Wikimedia Commons (CC/PD), अंतरराष्ट्रीय भूकंप-मापी आँकड़े और सार्वजनिक रिपोर्टें.
इस वीडियो के कुछ दृश्य AI से बनाए गए हैं, ताकि घटनाएँ सजीव दिखें. असली तस्वीरों पर स्रोत लिखा है.
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