गुड्डा गायन(राजस्थानी लोकगीत)
The Meena Lok
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गुड्डा गायन(राजस्थानी लोकगीत)
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तेरो सो मोटियार सारी दुनिया में कोन्याँ,
जीकै दो-दो छः लुगाई टाबर एक भी कोन्याँ॥१॥
आकाशा में नाव चालै अधर भरै क्यारी,
नाका पतली सी मोडै छः सोलहा तो शीश की नारी॥२॥
जनता लागै प्यारा उभी जीव सी प्यारी रे तु पतली सी..
सावण लेजा तेल लेजा बोरिंग पे नहाया,
चावण तिया का खाजा रे पाछै तू तो दाग में जाया॥३॥
समय करे नर के करे रे समय-समय की बात,
पृथ्वी ने राक्षस निगल गयो जब घबरागो त्रिलोकी को नाथ॥४॥
बैठ्यो रिहज्यो पावणा रे घी लाऊँ छूँ तार,
पीस वाळी पेट में और पो वाळी छः बार,
गेहूँ ऊभा खेत में निगोड्या जाज्यो रोटी खार॥५॥
काळा कब्जा बैरी तो में बास आवै छः,
कैयाँ जाऊँ रे आगा ने मोटी बार न्हावै छः॥६॥
चाँदी का किवाड साँकड बाजवाळी छः,
अब तेरो बणगो काम चिल्यो जा लकडी लागवाळी छः॥७॥
एक दूध गाय को र एक दूध मदिराय को र एक दूध कह छः माँय को,
चौथो दूध काई को रे गावाळा कह छः चिरजातो॥८॥
काळिसजी महाराज तेरो बाळक तू भी ध्यावै छः छोटो,
और एक अचंभो म्है सुण्या बाप जवाँई बेटा को रे॥९॥
सबा समझतो माँ-बाप समान मैं ढोक पगाँ में खातो,
धन-धन काळिस सुआ भगवान रोजीना तेरी जोत जुडातो॥१०॥
तेरी चरणाँ को अधिकारी मुँहडे बोल तो सरी रे.....
सुन्दर मन्दिर बणगो ढोल-नगाळा बाजै घुन्डी खोल तो सरी रे.......
राकेश कुमार मीणा
गाँव-वीलखो,सपोटरा,जिला-करौली(राज.)