84 Vaishnav Namavali 🙏 | Seva Dosh & Aparadh Nivaran Paath | Everyday Nitya Paath | Shri Gokulnathji
Vaidehi Shah
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84 Vaishnav Namavali 🙏 | Seva Dosh & Aparadh Nivaran Paath | Everyday Nitya Paath | Shri Gokulnathji
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Vaidehi Shah
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८४ वैष्णवों के नाम का स्मरण,
सेवा के दौरान हुए अपराधों और दोषों के निवारण का केवल एकमात्र उपाय माना गया है 🙏
श्री गोकुलनाथजी द्वारा श्री हरिरायजी को दिया गया यह उपदेश,
इस नामावली की महत्ता को दर्शाता है 🌸
श्री हरिरायजी स्वयं भी भोजन से पहले
इसका नित्य पाठ किया करते थे 💫
जो एक समय श्री हरिरायजी राजभोग पश्चात श्री गोकुलनाथजी के पास पधारे... और विनती की...
तातचरण भोजन का समय हुआ है...आप भोजन हेतु पधारे...
उस समय गोकुलनाथजी अति ग्लानी से बिराजे और श्री हरिरायजी की विनती सुनी नही....
तब श्री हरिरायजी जाने की तातचरण कुछ चिंतित है
इसलिए श्री हरिरायजी मोन खड़े रहे...
1 प्रहर बीतने के बाद श्री गोकुलनाथजी को ज्ञात हुआ की श्री हरिरायजी सामने खड़े है...
तब श्री गोकुलनाथजी ने कही अरे! बावा तुम कब पधारे?
तब श्री हरिरायजी कहे की! 1 प्रहर बीत गया भोजन की खबर देने आयो हतो
आपको चिंतित देख मोन खड़ा रहा...
तब श्री गोकुलनाथजी ने हरिरायजी से आज्ञा करी के! हरिराय हम श्री ठाकुरजी को प्रसाद केसे ले सके....
हमसे कोई सेवा ना बने.... श्रंगार करे तो प्रभु को हमारे नख लग जाय....
सामग्री करे तो कुछ भूल हो जाय....
नित्य कोई ना कोई अपराध हमसे हो जाता है सो हम इस महाप्रसाद के लायक नही है...
तब श्री हरिरायजी बड़ी देन्यता से विनती करे की...जो तात आप जो कहो हो उसमे कोई संशय नही है... जो आप बड़े हो तो आप सब जानो हो...
श्री आचार्यचरण आज्ञा करे है की देह टिकने के लिए महाप्रसाद लेना चाहिए पेट भरने के लिए नही...
भगवद सेवा में देह का विनियोग हो इसलिए महाप्रसाद लेना चाहिए...
जो आप एसी आज्ञा करो तो सामान्य जीव भगवद प्राप्ति केसे कर सके??
तब श्री गोकुलनाथजी आज्ञा किये की.... इस अपराध की निवृत्ति एक ही प्रकार से संभव है....
84 भगवदीय वैष्णव का नाम लेने मात्र से सारे अपराध की निवृत्ति हो सके....सो इन वैष्णवो की नामावली सदा सर्वदा करनी जिससे सारे अपराध दूर हो जाय...
तब श्री गोकुलनाथजी ने श्री हरिरायजी को 84 वैष्णवो की नामावली सुनाई।।
श्री हरिरायजी अपने जीवन में सदा इस नामावली का पाठ कर ही भोजन करने पधारते।।
रसासागर श्री गोकुलनाथजी की जय।।
शिक्षासागर श्री हरिरायजीमहाप्रभु की जय।।
Shri Gokulnathji dwara rachit - Shri 84 Vaishnav Namvali
Sung & Composed : Vaidehi Shah
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