संत कबीर दास जी की वाणी।।झगड़ा ऐक निबेरह राम।ज उ तुम अपने जन सू काम।। रविदास अमृतवाणी पाठशाला।।
Satguru Ravidas Pant Pracharak Devendradashmaharaj
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संत कबीर दास जी की वाणी।।झगड़ा ऐक निबेरह राम।ज उ तुम अपने जन सू काम।। रविदास अमृतवाणी पाठशाला।।
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