श्रीमद् भागवत् की महिमा - भाद्रपद पूर्णिमा विशेष//HG शरद विहारिणी देवी दासी
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ISKCON, Shri Vrinda Kunj, Malviya Nagar, New Delhi; 26th September, 2026; The Glory of the Srimad Bhagavatam – Bhadrapada Purnima Special
मुख्य बिंदु :-
भाद्रपद की पूर्णिमा में भागवत का दान करने से भगवत धाम जाने का पुण्य मिलता है।
भागवत अमल पुराण है। यदि हम श्रद्धा के साथ ध्यान पूर्वक भागवत सुनते हैं तो यह हमें निर्मल करती है और भगवान का प्रेम प्राप्त होता है।
भगवान को जानने के तीन मुख्य प्रमाण :- 1. प्रत्यक्ष प्रमाण - सामने देख कर जानना; 2. अनुमान प्रमाण - अंदाजे से, अनुमान से जानना 3. शब्द प्रमाण - भागवत के शब्दों को सुनकर जानना।
इनमें से शब्द प्रमाण सबसे श्रेष्ठ है।
जिसके घर में भागवत प्रमाण है उसका कभी अमंगल नहीं हो सकता, क्योंकि भागवत और भगवान श्री कृष्ण में कोई अंतर नहीं है।
भागवत श्रीकृष्ण के शरीर के समान है - पहले दो स्कंध भगवान के चरण हैं, तीसरा और चौथा स्कंध भगवान की जांघे, 5वां स्कंध भगवान का उदर, छठा स्कंध भगवान का वक्ष-स्थल, 7वां और 8वां स्कंध भगवान के बाजू, 9वाँ स्कंध भगवान की गर्दन, 10वां स्कंध भगवान का मुख मंडल, 11वां स्कंध भगवान का माथा और 12वां स्कंध भगवान का मुकुट है।
भागवत घर में रखने से और पठन-पाठन करने से हमारी आसुरी प्रवृत्तियों का विनाश होता है।
जो भागवत को पढ़ते और सुनते हैं वह बहुत पुण्यवान हैं, क्योंकि कई जन्मों की सुकृतियों के फलस्वरुप ही हमें यह अवसर मिलता है।
यदि कोई भागवत की शरण ले लेता है तो उसका कल्याण निश्चित है।