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महासू देवता मंदिर हनोल जौनसार बावर

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महासू देवता मंदिर हनोल जौनसार बावर

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उत्तराखंड के हनोल में स्थित महासू देवता मंदिर, कश्मीर से न्याय स्थापित करने आए चार दिव्य बंधुओं (बोथा, पाबासिक, वासिक और चल्दा महासू) को समर्पित एक पूजनीय मंदिर है। हिमालय के रक्षक के रूप में पूजे जाने वाले इन बंधुओं की कहानी धर्म की पुनर्स्थापना पर केंद्रित है, जो रुद्रप्रयाग में भगवान कार्तिकेय द्वारा अस्थियां अर्पित करने की पौराणिक कथा से भिन्न है। Wikipedia Wikipedia +4 महासू देवता मंदिर (हनोल) का मुख्य विवरण: देवता और उत्पत्ति: यह मंदिर चार महासु बंधुओं की सेवा करता है, जिन्हें भगवान शिव के भाई या अवतार माना जाता है, जिन्हें हुना भट नामक एक ब्राह्मण द्वारा इस क्षेत्र को बुराई से मुक्त करने के लिए इस क्षेत्र में लाया गया था। स्थान: उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश सीमा के निकट, हनोल में टोंस नदी के किनारे स्थित। संस्कृति: यह मंदिर जौनसार-बावर क्षेत्र की आस्था का केंद्र है, और इसमें अक्सर अद्वितीय, पारंपरिक लकड़ी और पत्थर की वास्तुकला देखने को मिलती है। Travel The Himalayas Travel The Himalayas +3 स्वामी कार्तिकेय की कहानी (कार्तिक स्वामी मंदिर): महासू मंदिर अलग हैं, वहीं रुद्रप्रयाग में स्वामी कार्तिकेय को समर्पित एक और प्रमुख उत्तराखंड मंदिर है, जो एक अलग कहानी से जुड़ा है। कथा: भगवान शिव ने अपने पुत्रों, कार्तिकेय और गणेश को ब्रह्मांड की परिक्रमा करने के लिए कहा। गणेश ने शिव और पार्वती की परिक्रमा करते हुए दावा किया कि वे ही ब्रह्मांड हैं। अपने प्रयासों के बावजूद चुनौती हारने पर क्रोधित कार्तिकेय ने अपने माता-पिता को बलिदान के रूप में अपना शरीर और अस्थियां अर्पित कर दीं। महत्व: कार्तिक स्वामी मंदिर उस स्थान के रूप में जाना जाता है जहां यह घटना घटी थी, और वहां देवता की पूजा की जाती है।Join this channel to get access to perks:‪@Joshivlogz‬    / @joshivlogz