प्रसिद्ध माँ चंद्रिका देवी सिद्धपीठ धाम की दर्शन यात्रा | 4K | दर्शन 🙏
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प्रसिद्ध माँ चंद्रिका देवी सिद्धपीठ धाम की दर्शन यात्रा | 4K | दर्शन 🙏
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श्रेय:
संगीत एवम रिकॉर्डिंग - सूर्य राजकमल
लेखक - रमन द्विवेदी
भक्तों नमस्कार! प्रणाम! सादर नमन और अभिनन्दन! भक्तों आज हम आपको अपने लोकप्रिय कार्यक्रम दर्शन के माध्यम से जिस मंदिर की यात्रा करवाने जा रहे हैं वो चन्द्रिका देवी मंदिर के नाम से विख्यात है।
मंदिर के बारे में:
भक्तों चन्द्रिका देवी मंदिर लखनऊ शहर से उत्तर दिशा में करीब 30 किलोमीटर दूर प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण कठवारा नामक स्थान पर गोमती नदी के तट पर बक्शी का तालाब नमक क्षेत्र पर स्थित है। चन्द्रिका देवी मंदिर पूरे भारतवर्ष के लोगों की आस्था का केंद्र होने के साथ-साथ एक दर्शनीय स्थल भी है जो यहाँ पहुँचने वाले भक्तों को भक्ति के साथ-साथ अनुपम प्राकृतिक सुखों की अनुभूति करवाता है। यह मन्दिर अत्यंत पुराना है यहाँ हर महीने अमावस्या और नवरात्रि के अवसर पर लाखों भक्तो का जमघट देखने को मिलता है
पौराणिक कथाएं:
भक्तों चन्द्रिका देवी मंदिर सम्बंधित कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं, इनमें से एक पौराणिक कथा के अनुसार – त्रेता युग में एक बार भगवान् राम के छोटे भाई लक्ष्मण के बड़े पुत्र राजकुमार चंद्रकेतु और लक्ष्मणपुर अर्थात लखनऊ के अधिपति अश्वमेघ के घोड़े के साथ यहाँ से गुजर रहे थे। चलते-चलते रात्रि हो गई और उस दिन अमावस्या थी। रात होने के कारण चंद्रकेतु को यहीं रुकना पड़ा। किन्तु चारो तरफ घना जंगल होने के कारण राजकुमार चंद्रकेतु को डर लग रहा था। अतः राजकुमार चंद्रकेतु ने देवी से अपनी सुरक्षा के लिए प्रार्थना की। चंद्रकेतु के प्रार्थना सुनकर माँ वहां प्रकट हुईं। उन्होंने राजकुमार चंद्रकेतु से उन्हें याद करने का कारण पूछा तब राजकुमार ने अपनी पूरी आप बीती माता से बताई। माँ चन्द्रिका ने उन्हें आश्वस्त रहने को कहा तथा उनकी पूरी सुरक्षा का वादा करते हुए नवदुर्गाओं को स्मरण करने का आदेश दिया. तब राजकुमार चंद्रकेतु ने माता द्वारा बताए गए नवदुर्गाओं का स्मरण किया। कहा जाता है कि वो काली रात भी मां की कृपा से चांदनी रात में परिवर्तित हो गई और मां चंद्रिका देवी स्वयं उनके समक्ष प्रकट हुईं और उनकी रक्षा करने का आश्वासन दिया।
एक दूसरी कथा के अनुसार:
एक बार भगवान् श्री कृष्ण ने घटोत्कच के बेटे बर्बरीक को भी देवी चन्द्रिका के शरण में जाकर ध्यान लगाने के लिए सलाह दि ताकि उसके शक्ति में बढ़ोतरी हो सके। बर्बरीक ने भगवान् कृष्ण के सलाह अनुसार देवी के शरण में तीन वर्ष तक कठिन तपस्या की। इस तपस्या से माँ चन्द्रिका प्रसन्न हुईं और बर्बरीक को असीम शक्तियां प्रदान की।
भक्तों तीसरी पौराणिक कथा के अनुसार:
महाभारत काल में पांडवों ने वनवास के दौरान यहां वास किया, अश्वमेध यज्ञ किया और घोड़े को छोड़ा। उस काल के शासक राजा हंसध्वज ने घोड़े को रोक लिया. परिणामस्वरूप पाण्डवों और हंसध्वज के मध्य युद्ध हुआ। किन्तु युद्ध में हंसध्वज का दूसरा पुत्र सुधन्वा शामिल नहीं हुआ। वो मां चंद्रिका देवी का बड़ा भक्त था और उनकी भक्ति में खुद को समर्पित कर दिया था। राजा ने क्रोध में आकर उसको महीसागर क्षेत्र स्थित खौलते हुए तेल में डलवाकर उसकी परीक्षा ली। मां की असीम अनुकम्पा से उसके शरीर को कुछ नहीं हुआ। इसके बाद महीसागर तीर्थ को सुधन्वा कुण्ड के नाम से भी जाना जाने लगा। मान्यता है कि इस तीर्थ पर भक्तों की मनोकामना तो पूरी होती ही है, साथ उनके पापों का भी समूल नाश होता है।
भक्तों कहा जाता है कि राजा दक्ष प्रजापति द्वारा दिए गए श्राप से मुक्ति पाने के लिए स्वयं चंद्रदेव भी इस स्थान पर आए और इस पवित्र कुण्ड में स्नान किए।मंदिर की मान्यता और लोकप्रियता के कारण यहां हर महीने की अमावस्या पर मेला भी लगता है, जिसमें लाखों भक्तों की काफी भीड़ देखने को मिलती है।
इतिहास:
भक्तों चन्द्रिका देवी मंदिर के इतिहास का संबंध महाभारत और रामायण काल से जुड़ा हुआ है मान्यता के अनुसार- सुधन्वा कुण्ड के पास स्थित एक प्राचीन नीम के वृक्ष के कोटर में नौ दुर्गाओ के साथ उनकी वेदियाँ आज भी मौजूद है. कुछ जानकारों का कहना है कि ये मंदिर 12 वीं शताब्दी से पहले का बना हुआ है। 12 वी सदी के आसपास विदेशी आक्रमणकारी यहाँ आएं और उन्होंने हजारों मंदिरों को अपना शिकार बनाया. उन्हें लूटा खसोटा, तोड़ा फोड़ा और तमाम मंदिरों को नष्ट भ्रष्ट कर दिया। उसी आक्रमण में चंद्रिका देवी मंदिर को भी काफी हद तक नष्ट कर दिया। यद्यपि यहाँ प्राचीन मंदिर या भवन का कोई साक्ष्य नहीं मिलता.
मंदिर का निर्माण:
भक्तों चन्द्रिका माता के वर्तमान मंदिर का इतिहास करीब 300 वर्ष पुराना है. यह भव्य मंदिर एक ऊँचे चबूतरे पर बना हुआ है. जिसे आसपास के स्थानीय लोगों द्वारा बनवाया गया था।
माँ ने मंदिर बनाने का स्वप्नादेश दिया:
भक्तों एक प्रचलित लोककथा के अनुसार- एक व्यक्ति को स्वप्न में माता चन्द्रिका के दर्शन हुए और माता ने उसे अपना परिचय देते हुए मंदिर बनवाने का स्वप्नादेश दिया | और धीरे धीरे वर्तमान भव्य मंदिर बनकर तैयार हो गया.
भक्त को भगवान से और जिज्ञासु को ज्ञान से जोड़ने वाला एक अनोखा अनुभव। तिलक प्रस्तुत करते हैं दिव्य भूमि भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थानों के अलौकिक दर्शन। दिव्य स्थलों की तीर्थ यात्रा और संपूर्ण भागवत दर्शन का आनंद। दर्शन ! 🙏
इस कार्यक्रम के प्रत्येक एपिसोड में हम भक्तों को भारत के प्रसिद्ध एवं प्राचीन मंदिर, धाम या देवी-देवता के दर्शन तो करायेंगे ही, साथ ही उस मंदिर की महिमा उसके इतिहास और उसकी मान्यताओं से भी सन्मुख करायेंगे। तो देखना ना भूलें ज्ञान और भक्ति का अनोखा दिव्य दर्शन। 🙏
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि तिलक किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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